फेल सर्जरी के बाद भी डा0 सिद्धार्थ ने कर दिखाया कमाल गले से आधा किलो ट्यूमर निकाल बचाई मरीज की जान
जौनपुर। जनपद में सर्जरी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके प्रख्यात सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ ने एक ऐसे मरीज के गले से ट्यूमर निकालकर उसकी जान बचा ली, जिसका पूर्व में ऑपरेशन हो चुका था। दो घंटे से अधिक समय तक चली जटिल सर्जरी के बाद लगभग आधा किलो से अधिक वजन का ट्यूमर निकाला गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत पूरी तरह खतरे से बाहर बताई जा रही है। डा0 सिद्धार्थ की इस उपलब्धि से परिजन बेहद खुश हैं।
बताया जाता है कि मडिय़ाहूं तहसील क्षेत्र के बेलवा स्थित साहोपट्टी निवासी 35 वर्षीय अरविन्द पुत्र श्याम गौतम को पिछले दस वर्षों से पैराटिड ग्लैण्ड का ट्यूमर था। परेशानी बढ़ने पर कुछ वर्ष पूर्व शहर के ही एक सर्जन से उसका ऑपरेशन कराया गया, लेकिन ऑपरेशन सफल न होने के कारण ट्यूमर फिर से बढ़ने लगा। धीरे-धीरे वह अपने असली रूप में आ गया। ट्यूमर बड़ा होने पर जब उसे ऑपरेशन करने वाले चिकित्सक को दिखाया गया तो उन्होंने ईएनटी सर्जन के पास भेज दिया। वहां से उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया।
परिजन मरीज को लेकर कई अस्पतालों में गए, लेकिन किसी ने ऑपरेशन करने की जिम्मेदारी नहीं ली। उधर ट्यूमर बढ़ने से गला, सांस और भोजन की नली पर दबाव बढ़ने लगा, जिससे मरीज को काफी परेशानी होने लगी। इसी बीच किसी के सुझाव पर उसे शहर के वाजिदपुर उमरपुर स्थित सिद्धार्थ हॉस्पिटल के जाने-माने सर्जन डा0 लाल बहादुर सिद्धार्थ को दिखाया गया। डा0 सिद्धार्थ ने मरीज को ठीक करने का भरोसा दिलाते हुए भर्ती कर लिया और शनिवार को ऑपरेशन कर दिया।
करीब दो घंटे से अधिक समय तक चले सफल ऑपरेशन में आधा किलो से अधिक वजन का ट्यूमर निकाला गया। अब मरीज की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। हालांकि वह अभी भी अस्पताल में भर्ती है, लेकिन स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है। टांके कटने के बाद उसे छुट्टी दे दी जाएगी।
इस संबंध में पूछे जाने पर डा0 सिद्धार्थ ने बताया कि ऑपरेशन बहुत ही कठिन था। बेहोशी के समय ट्यूब डालने में भी परेशानी हो रही थी। खतरे को देखते हुए ऑपरेशन दो घंटे से अधिक समय तक चला। पूर्व के ऑपरेशन में ट्यूमर का कुछ भाग छूट गया था, जिससे वह फिर से बढ़ गया था। ऐसे ट्यूमर का ऑपरेशन कठिन होता है और इसमें जानकार ही सफल हो पाते हैं। यदि ऑपरेशन में और देर होती तो जान का भी खतरा था, क्योंकि इसके बड़ा होने पर सांस एवं खाने की दोनों नलियां अपने आप बंद हो सकती थीं।
उन्होंने ऐसे मरीजों के परिजनों को सलाह दी कि यदि कान, गला और जबड़े के पास ट्यूमर हो तो तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक को दिखाएं, जिससे समय रहते उसका उपचार किया जा सके। ऑपरेशन की सफलता में डा0 सिद्धार्थ के अलावा एनेस्थेटिक्स डा0 राजेश त्रिपाठी, डा0 रवि सिंह, डा0 विनोद यादव, डा0 राजेन्द्र, धर्मेन्द्र कुमार यादव, दीपक तिवारी, शुभम निषाद, नीरज कुमार आदि का भी योगदान सराहनीय रहा।

