16 रुपये का कैरी बैग लुलु मॉल को पड़ा भारी, उपभोक्ता आयोग ने लगाया साढ़े चार हजार रुपये का हर्जाना
आयोग के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह तथा सदस्य गीता की पीठ ने यह निर्णय जौनपुर के उमरपुर-रूहट्टा निवासी घनश्याम प्रसाद ओझा की ओर से दायर परिवाद पर सुनाया। परिवादी की ओर से अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।
परिवाद के अनुसार, एक मार्च 2025 को घनश्याम प्रसाद ओझा ने लखनऊ स्थित लुलु हाइपरमार्केट से 669 रुपये की खरीदारी की थी। बिलिंग के दौरान उनसे कैरी बैग के नाम पर 16 रुपये अतिरिक्त वसूल लिए गए। उनका आरोप था कि मॉल में ग्राहकों को अपना बैग भीतर ले जाने की अनुमति नहीं थी, जबकि कहीं भी यह सूचना प्रदर्शित नहीं की गई थी कि कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क देना होगा। जिस कैरी बैग के लिए पैसे लिए गए, उस पर भी कीमत अंकित नहीं थी।
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि खरीदारी पूरी होने के बाद ग्राहक को कैरी बैग खरीदने के लिए विवश करना उचित व्यापारिक आचरण नहीं है। आयोग ने कहा कि किसी भी वस्तु की कीमत और उसकी जानकारी पहले से उपलब्ध कराना विक्रेता का दायित्व है, ताकि उपभोक्ता अपनी इच्छा से निर्णय ले सके। बिना पूर्व सूचना के अतिरिक्त शुल्क वसूलना उपभोक्ता के अधिकारों का हनन है।
आयोग ने अपने आदेश में लुलु हाइपरमार्केट को 16 रुपये कैरी बैग की कीमत लौटाने, 1500 रुपये मानसिक उत्पीड़न एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार के लिए तथा 3000 रुपये वाद व्यय के रूप में अदा करने का निर्देश दिया। निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान न होने की स्थिति में पूरी राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
उपभोक्ता आयोग के इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह संदेश भी गया है कि छोटी राशि के मामलों में भी यदि उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यवहार होता है, तो कानून उसके अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह तत्पर है।

