करोड़ों के कॉर्पोरेट करियर को ठुकराकर खेतों की मिट्टी से लिखी सफलता की नई इबारत, आज हजारों किसानों के प्रेरणास्रोत हैं किसान वैज्ञानिक राजनीश कुमार सिंह
जौनपुर के लाल ने गांव लौटकर खड़ी की कृषि क्रांति की नई मिसाल, वैज्ञानिक खेती, मत्स्य पालन और फूड प्रोसेसिंग से बदल रहे किसानों और महिलाओं की तकदीर
जौनपुर। आज जब अधिकांश युवा बेहतर भविष्य की तलाश में गांव छोड़कर महानगरों का रुख कर रहे हैं, वहीं जौनपुर के एक युवा ने महानगर की चमक-दमक, ऊंचे वेतन और कॉर्पोरेट दुनिया की सुविधाओं को छोड़कर गांव की मिट्टी को अपना भविष्य बनाया। यह निर्णय केवल उनके जीवन का नहीं, बल्कि हजारों किसानों, युवाओं और महिलाओं की जिंदगी बदलने वाला साबित हुआ। हम बात कर रहे हैं जनपद जौनपुर के ग्राम नवापुर निवासी किसान वैज्ञानिक एवं कृषि उद्यमी राजनीश कुमार सिंह की, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सोच बड़ी हो, इरादे मजबूत हों और लक्ष्य समाज की सेवा हो, तो खेत की मिट्टी भी सफलता का ऐसा इतिहास लिख सकती है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखें।
राजनीश कुमार सिंह का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। गांव के परिवेश में पले-बढ़े राजनीश ने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा गांव में ही प्राप्त की। आगे की पढ़ाई के लिए वे दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने स्नातक, स्नातकोत्तर और एम.बी.ए. की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी होते ही उनके सामने सफलता के अनेक रास्ते खुल गए। उन्होंने देश की प्रतिष्ठित कंपनियों McCann, Ericsson, Dentsu, Madison और ETV जैसी नामचीन संस्थाओं में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। मार्केटिंग, मीडिया, ब्रांडिंग, संचार और प्रबंधन के क्षेत्र में उन्होंने वर्षों तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
सब कुछ बेहतर चल रहा था, लेकिन वर्ष 2020 में आई कोरोना महामारी ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। लॉकडाउन के दौरान जब वे अपने गांव लौटे तो उन्होंने किसानों की वास्तविक परेशानियों को बेहद करीब से देखा। उन्हें महसूस हुआ कि गांवों में मेहनत की कमी नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक जानकारी और सही मार्गदर्शन का अभाव है। उसी समय उन्होंने ऐसा फैसला लिया, जिसे सुनकर उनके अपने भी हैरान रह गए। उन्होंने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी और अपना पूरा जीवन कृषि और ग्रामीण विकास के लिए समर्पित कर दिया।
गांव लौटने के बाद उन्होंने "वसुंधरा एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर" (Vasundhara Agriculture Research Centre) की स्थापना की। उनका उद्देश्य केवल खेती करना नहीं था, बल्कि किसानों को वैज्ञानिक खेती सिखाना, नई तकनीकों से जोड़ना और कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाना था। आज उनका संस्थान पूर्वांचल में आधुनिक कृषि प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है, जहां दूर-दूर से किसान नई तकनीकों को सीखने पहुंचते हैं।
राजनीश कुमार सिंह ने खेती को केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने एकीकृत कृषि (Integrated Farming) का ऐसा मॉडल विकसित किया, जिसमें खेती, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, पशुपालन और फूड प्रोसेसिंग एक-दूसरे के पूरक बनकर किसानों की आय बढ़ाने का माध्यम बनते हैं। उनका मानना है कि यदि किसान एक ही संसाधन से कई प्रकार की आय के स्रोत विकसित करे, तो खेती घाटे का नहीं बल्कि सबसे लाभकारी व्यवसाय बन सकती है।
उनकी इसी दूरदर्शी सोच और कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय ने उन्हें "किसान वैज्ञानिक" की उपाधि से सम्मानित किया। यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का नहीं, बल्कि उस नई सोच का भी सम्मान है, जो खेती को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ती है।
राजनीश कुमार सिंह ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके प्रयासों से लगभग 200 महिलाओं को फूड प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण मिला। अचार, जैम, जेली, मुरब्बा, मसाले और अन्य खाद्य उत्पाद बनाकर आज कई महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ चुकी हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में उनका योगदान किसी क्रांति से कम नहीं है। हजारों मत्स्य पालक किसान आज उनके मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक से मछली पालन कर रहे हैं। उनके संस्थान से किसानों को गुणवत्तापूर्ण मछली बीज, संतुलित चारा, तकनीकी सलाह और प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
युवाओं को रोजगार देने के बजाय रोजगार पैदा करने की सोच विकसित करना भी उनके मिशन का हिस्सा है। वे समय-समय पर प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर युवाओं को बताते हैं कि कृषि केवल पारंपरिक खेती नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का सफल व्यवसाय भी बन सकती है। उनके प्रशिक्षण से प्रेरित होकर अनेक युवा कृषि आधारित स्टार्टअप और उद्यम शुरू कर चुके हैं।
आज राजनीश कुमार सिंह का सपना है कि जौनपुर आधुनिक कृषि, मत्स्य पालन और ग्रामीण उद्यमिता का राष्ट्रीय केंद्र बने। वे चाहते हैं कि गांव का हर किसान वैज्ञानिक खेती अपनाए, हर युवा खेती को सम्मानजनक करियर के रूप में देखे और हर महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने।
वे अक्सर कहते हैं— "खेती में यदि विज्ञान, तकनीक और बेहतर प्रबंधन का समावेश हो जाए, तो किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि देश का सफल उद्यमी बन सकता है।"
उनकी यह सोच अब एक आंदोलन का रूप ले चुकी है। हजारों किसान उनकी सलाह पर आधुनिक खेती अपना रहे हैं, महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ रही हैं और युवा गांव में रहकर नए अवसर तलाश रहे हैं।
राजनीश कुमार सिंह की संघर्ष, समर्पण और सफलता की यह कहानी केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस विश्वास की कहानी है कि यदि इरादे मजबूत हों तो गांव की मिट्टी भी दुनिया की सबसे बड़ी सफलता का आधार बन सकती है। आज वे जौनपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के किसानों के लिए प्रेरणा, मार्गदर्शक और नई कृषि क्रांति के मजबूत स्तंभ बन चुके हैं।

