परिवार न्यायालय प्रथम का अधिवक्ताओं ने किया बहिष्कार, बोले—स्थानांतरण तक नहीं करेंगे कार्य

जौनपुर। सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन ने परिवार न्यायालय (प्रथम) के पीठासीन अधिकारी की अदालत का पूर्ण बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि संबंधित अदालत में अधिवक्ताओं के साथ लगातार असहज एवं सम्मानजनक व्यवहार न होने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी के विरोध में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुभाष चंद्र यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जब तक परिवार न्यायालय प्रथम के पीठासीन अधिकारी विमल प्रकाश आर्य का स्थानांतरण नहीं हो जाता, तब तक कोई भी अधिवक्ता उनकी अदालत में न्यायिक कार्य नहीं करेगा।

अध्यक्ष ने बताया कि इस संबंध में पूर्व में उच्च न्यायालय को प्रार्थना पत्र भेजकर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद बार एसोसिएशन ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का फैसला लिया।

बैठक में अधिवक्ताओं ने कहा कि न्याय व्यवस्था में बार और बेंच दोनों की समान भूमिका है। न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के साथ-साथ अधिवक्ताओं के सम्मान की भी रक्षा होनी चाहिए। बार एसोसिएशन ने सभी अधिवक्ताओं से पारित प्रस्ताव का पालन करने की अपील की।

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