शास्त्रीय संगीत और कजरी के रंग में रंगा मोहम्मद हसन पीजी कॉलेज, प्रतिभाओं ने बांधा समां
जौनपुर। मोहम्मद हसन पी.जी. कॉलेज में संगीत विभाग की ओर से शास्त्रीय संगीत एवं कजरी महोत्सव-2026 का भव्य एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। संगीत, लोककला और सावन की परंपराओं से सजे इस महोत्सव में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों एवं दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महोत्सव के दौरान मेहंदी एवं गायन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और गायन प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान के लिए मोमेंटो एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अधिवक्ता एवं अतुल्य वेलफेयर ट्रस्ट की संस्थापक अध्यक्ष उर्वशी सिंह रहीं। महाविद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि का पारंपरिक सावन श्रृंगार, मेहंदी एवं चूड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। इसके बाद उन्हें बुके, मोमेंटो एवं अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि उर्वशी सिंह ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के अभिन्न अंग हैं। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए मंच देने के साथ ही उन्हें भारतीय संस्कृति, लोक परंपराओं और अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के लिए इस तरह के कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ. नगमा, डॉ. ममता सिंह, डॉ. प्रेमलता गिरि, डॉ. साहिदा परवीन, डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव, डॉ. अंकिता सिंह, आदिति मिश्रा, डॉ. अनुराधा सिंह, एकता यादव सहित महाविद्यालय के शिक्षकगण एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन प्रज्ञा मिश्रा ने किया। अपनी सहज एवं आकर्षक संचालन शैली से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को क्रमबद्ध बनाए रखा और प्रतिभागियों का उत्साह भी बढ़ाया।
शास्त्रीय संगीत, कजरी, मेहंदी और सावन के पारंपरिक रंगों से सजा यह महोत्सव विद्यार्थियों एवं अतिथियों के लिए यादगार बन गया। कार्यक्रम ने न केवल युवा प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर दिया, बल्कि भारतीय संगीत और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाने का संदेश भी दिया।

