शिक्षा मित्र से सहायक अध्यापक बने शिक्षकों को भी मिले पुरानी पेंशन: देवेन्द्र प्रताप सिंह
जौनपुर । विभिन्न शिक्षक भर्तियों में शिक्षा मित्र पद पर सेवा देने के पश्चात सहायक अध्यापक बने शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन देने का मामला बुधवार को विधान परिषद में विधान परिषद सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह ने नियम 115 के तहत उठाते हुए कहा कि ऐसे हजारों शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश रिटायरमेंट बेनिफिट रुल्स 1961 के नियम 3 (8) के उस प्रावधान की चर्चा की जिसके तहत किसी अस्थाई कर्मचारी के नियमित होने के बाद पुरानी पेंशन हेतु अस्थाई सेवा अवधि को कुल सेवा में जोड़ी जानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि अब तक ऐसे शिक्षकों से प्रदेश के 47 जनपदों में आदेश जारी कर विकल्प पत्र जमा कराये जा चुके हैं शेष 28 जनपदों में विकल्प पत्र नहीं जमा कराये गये हैं जिससे उनकी जी पी एफ कटौती नहीं शुरू हो पा रही है जिससे शिक्षकों में रोष व्याप्त है। उन्होंने बकाया जनपदों में भी विकल्प पत्र लेकर अविलम्ब जी पी एफ कटौती शुरू करने की मांग की।जिस पर सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने मामले को आवश्यक कार्रवाई हेतु सरकार को सन्दर्भित कर दिया।
गौरतलब है कि ऐसे सहायक अध्यापक जो पूर्व में शिक्षा मित्र पद पर सेवा दे चुके हैं और उनका शिक्षा मित्र पद का विज्ञापन 28 मार्च 2005 से पूर्व का है,वे अपनी शिक्षा मित्र पद पर दी गई पुरानी सेवा के आधार पर पुरानी पेंशन की मांग विगत दो वर्षों से कर रहे हैं।
जनपद जौनपुर के शिक्षक राजीव सिंह, आशीष श्रीवास्तव,रामनारायण यादव,सजल सिंह, कामाख्या नारायण राय,गौरी शंकर यादव,पंधारी यादव,राम चन्द्र पाल,सुनील मौर्य, अरविंद गुप्ता, सुनील यादव आदि ने खुशी जाहिर करते हुए माननीय विधान परिषद सदस्य के प्रति आभार व्यक्त किया।

