खेल मंत्री के जिले में स्टेडियम बेहाल, मैदान में खिलाड़ियों की जगह उग आईं झाड़ियां
करोड़ों की लागत से बने ग्रामीण स्टेडियम में खेल सुविधाएं बदहाल, गिट्टी से पटा मैदान और टूटे पड़े कसरत के उपकरण
जौनपुर। प्रदेश सरकार में खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के गृह जनपद में खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए बनाई गई खेल सुविधाओं की हकीकत सरकारी दावों से इतर नजर आ रही है। खुटहन विकासखंड के शेखपुर सुतौली गांव स्थित ग्रामीण स्टेडियम की तस्वीरें व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। जिस मैदान में गांव के खिलाड़ियों के कदमों की आहट, दौड़ते युवाओं की रफ्तार और खेल प्रतिभाओं के सपने नजर आने चाहिए थे, वहां इन दिनों घास-फूस, झाड़ियां और जंगली पौधों का कब्जा दिखाई दे रहा है।करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस ग्रामीण स्टेडियम का उद्देश्य ग्रामीण अंचल के युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराना और गांव की प्रतिभाओं को जिला, प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर देना था। लेकिन मौजूदा स्थिति देखकर ऐसा लगता है कि स्टेडियम में खेल गतिविधियों से ज्यादा उपेक्षा की दौड़ जारी है।
रनिंग ट्रैक पर गिट्टी, मैदान में झाड़ियां
स्टेडियम के मैदान की हालत खिलाड़ियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। जगह-जगह गिट्टी बिखरी पड़ी है और मैदान में झाड़ियां व जंगली पौधे उग आए हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए दौड़ना, अभ्यास करना और नियमित खेल गतिविधियां संचालित करना मुश्किल नजर आता है।
जिस रनिंग ट्रैक पर युवाओं को अपनी रफ्तार नापनी चाहिए, वहां बिखरी गिट्टियां चोट का कारण बन सकती हैं। मैदान की नियमित सफाई और रखरखाव के अभाव ने खेल परिसर की सूरत बिगाड़ दी है।
वॉलीबॉल-बैडमिंटन के नेट गायब, उपकरण भी टूटे
स्टेडियम में खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई गई खेल सुविधाओं की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। बैडमिंटन और वॉलीबॉल के नेट नजर नहीं आ रहे हैं। वहीं युवाओं की फिटनेस के लिए लगाए गए कसरत के उपकरणों में भी कई खराब और टूटे पड़े बताए जा रहे हैं।
यानी जिस स्टेडियम में ग्रामीण युवाओं को फिटनेस के साथ विभिन्न खेलों का अभ्यास करना चाहिए था, वहां खेल सामग्री और सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है।
गार्ड रूम में ताला, हैंडपंप भी खराब
स्टेडियम की सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परिसर में बने गार्ड रूम पर ताला लटका हुआ है। पेयजल के लिए लगाया गया देशी हैंडपंप भी खराब बताया जा रहा है।
खिलाड़ियों के लिए मैदान, व्यायाम उपकरण, खेल सामग्री और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं होंगी तो ग्रामीण प्रतिभाएं आखिर अभ्यास कैसे करेंगी? यही सवाल अब क्षेत्र के लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
खेल प्रतिभाओं की ‘दौड़’ रुकी, घास-फूस की रफ्तार बढ़ी
सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए लगातार खेल सुविधाओं के विस्तार की बात करती है। ग्रामीण स्टेडियम इसी सोच का हिस्सा हैं। लेकिन शेखपुर सुतौली में तस्वीर इसके उलट नजर आती है।
खिलाड़ियों की जगह मैदान में झाड़ियां बढ़ रही हैं, दौड़ने के ट्रैक पर गिट्टी बिखरी है और फिटनेस उपकरण दम तोड़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जिस मैदान को खिलाड़ियों के पसीने से आबाद होना था, वहां सरकारी उपेक्षा की घास इतनी तेजी से कैसे उग आई?
करोड़ों खर्च के बाद रखरखाव कौन करेगा?
ग्रामीण स्टेडियम के निर्माण में बड़ी धनराशि खर्च की गई। निर्माण के बाद इसकी देखरेख और खेल सुविधाओं को चालू हालत में रखने की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की है। लेकिन मौजूदा हालात देखकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी योजनाओं की जिम्मेदारी निर्माण और उद्घाटन तक ही सीमित रह जाती है?
यदि मैदान की नियमित सफाई, खेल उपकरणों की मरम्मत और खिलाड़ियों के लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था समय-समय पर होती तो आज स्टेडियम की यह तस्वीर शायद सामने नहीं आती।
खेल मंत्री के जिले में खेल व्यवस्था पर सवाल
जौनपुर को खेल प्रतिभाओं की धरती माना जाता है और जिले से कई खिलाड़ियों ने विभिन्न स्तरों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ऐसे में खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव के जिले में ग्रामीण स्टेडियम की बदहाली निश्चित रूप से व्यवस्था के लिए आईना है।
सरकार गांव-गांव खेल मैदान और ग्रामीण स्टेडियम विकसित कर युवाओं को खेलों से जोड़ने का प्रयास कर रही है। लेकिन यदि तैयार खेल परिसंपत्तियां ही रखरखाव के अभाव में बदहाल हो जाएं तो इस पूरी व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
बीडीओ की निगरानी पर भी उठे सवाल
खुटहन विकासखंड में विकास कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों की होती है। ऐसे में सवाल है कि क्या शेखपुर सुतौली के ग्रामीण स्टेडियम का नियमित निरीक्षण किया गया? यदि निरीक्षण हुआ तो मैदान में उगी झाड़ियों, बिखरी गिट्टी, टूटे उपकरण, गायब नेट और खराब हैंडपंप पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने स्टेडियम की स्थिति की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी? क्या रखरखाव के लिए बजट या व्यवस्था तय है? और यदि है तो उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है?
खिलाड़ियों की मांग—मैदान को फिर मिले खेल की पहचान
क्षेत्र के युवाओं और खेल प्रेमियों की अपेक्षा है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण कराए। मैदान की तत्काल सफाई, गिट्टी हटाने, क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत, वॉलीबॉल-बैडमिंटन के नेट उपलब्ध कराने और पेयजल की व्यवस्था बहाल कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
क्योंकि स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए बना है, झाड़ियों के लिए नहीं। मैदान में पसीना बहना चाहिए, घास-फूस नहीं बढ़नी चाहिए।
अब देखना यह है कि शेखपुर सुतौली के ग्रामीण स्टेडियम की यह तस्वीर सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर खेल सुविधाओं को पटरी पर लाते हैं या फिर सरकारी उपेक्षा की यह ‘खेल कहानी’ यूं ही चलती रहती है।
सवाल सीधा है—खेल मंत्री के जिले में खिलाड़ियों का मैदान बदहाल रहेगा तो गांव की प्रतिभाएं आखिर अपनी उड़ान कहां से भरेंगी?


