बच्चों को न मारें, चोट से अधिक आत्मसम्मान को पहुंचता है आघात: अमरेश कुमार सिंह
शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी में बालिका सुरक्षा और बच्चों की नियमित उपस्थिति पर हुई चर्चा
जौनपुर। प्राथमिक विद्यालय गहोरा में शनिवार को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। खंड शिक्षा अधिकारी सिरकोनी अमरेश कुमार सिंह के दिशा-निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में बालिका सुरक्षा, बच्चों की शैक्षिक प्रगति, नियमित उपस्थिति और अभिभावकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में अभिभावकों को संबोधित करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि बच्चों के बेहतर विकास के लिए परिवार का सकारात्मक वातावरण बेहद जरूरी है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को किसी भी स्थिति में मारें नहीं। मारपीट से लगी चोट शारीरिक से अधिक मानसिक होती है, जिसका प्रभाव बच्चे के आत्मसम्मान और व्यक्तित्व पर लंबे समय तक पड़ सकता है।
उन्होंने बालिका सुरक्षा को लेकर अभिभावकों को जागरूक करते हुए कहा कि बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने के साथ उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना माता-पिता और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बच्चों से संवाद बनाए रखने और उनकी समस्याओं को समझने पर भी जोर दिया गया।
संगोष्ठी में विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को लेकर भी चर्चा हुई। अभिभावकों से कहा गया कि वे बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजें और उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने में सहयोग करें। वहीं, डीबीटी के माध्यम से प्राप्त धनराशि का उपयोग बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं के लिए करने की अपील की गई।
खंड शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता में विद्यालय के साथ-साथ अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों के अभिभावकों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
संगोष्ठी में ग्राम प्रधान आरती देवी जायसवाल, एसएमसी अध्यक्ष बदामा देवी, उपाध्यक्ष समर बहादुर यादव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, प्राथमिक विद्यालय गहोरा के शिक्षक, रसोइया और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे। अभिभावकों ने बच्चों की शिक्षा और विद्यालय की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए।
कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता से विद्यालय परिसर में सकारात्मक शैक्षणिक माहौल देखने को मिला। अधिकारियों और शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई के साथ उनके व्यवहार, सुरक्षा और मानसिक विकास पर भी विशेष ध्यान देने की अपील की।

