शिक्षक दिवस पर कवि-गोष्ठी में बही साहित्य और संवेदनाओं की रसधार
जौनपुर। साहित्य चेतना समाज, जौनपुर इकाई के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। जानकीपुरम कॉलोनी स्थित शिक्षिका एवं कवयित्री सुमति श्रीवास्तव के आवास पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत मिश्र ने की, जबकि संचालन राजेश पाण्डेय ने किया।
कवि-गोष्ठी में रचनाकारों ने अपनी विविध रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। डॉ. प्रतीक मिश्र ने “कदम से कदम को मिलाते चलो, तुम बढ़ो दूसरों को बढ़ाते चलो” सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी। डॉ. विभा तिवारी ने “जितनी ऊँची इमारत बनाता गया, उतना ही छोटा होता गया आदमी” के माध्यम से आधुनिक समाज में मानवीयता के संकट की ओर ध्यान आकृष्ट किया।
राजेश पाण्डेय ने “व्यर्थ जीवन न हो ढूँढने में तुझे, ऐ खुदा तू बता घर कहाँ है तेरा” सुनाकर श्रोताओं की खूब प्रशंसा अर्जित की। गाजीपुर से आए संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ ने “आगे बढ़ते उत्साही को, कब रोक सकीं दुर्गम राहें, मंजिल खुद उसे बुलाती है, फैला करके दोनों बाहें” सुनाकर संघर्ष और सफलता का सार्थक संदेश दिया।
कवयित्री सुमति श्रीवास्तव ने “लालिमा है लिए ये हँसी शाम सी, प्रेम की राह है ये हँसी शाम सी” प्रस्तुत कर वातावरण को आनंदमय बना दिया। डॉ. रामजी तिवारी ने अपने सुमधुर कंठ से “कान्हा रे! तेरी मुरली बहुत सतावै” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर किया। प्रशांत प्रबोध ने “बहुत मुश्किल है सपनों को अपना बनाना, अपने को भूला दूसरे को अपना दिखाना” सुनाकर आत्ममंथन के लिए विवश किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत मिश्र ने “दरिया को क्या पता कि कहाँ तक उसे जाना, तकदीर ही देती है समन्दर का ठिकाना” सुनाकर कवि-गोष्ठी को सार्थक ऊँचाई प्रदान की।
इस अवसर पर वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव, जितेन्द्र कुमार, कार्वी, अंश श्रीवास्तव, किशोर ओझा सहित अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

