डीएम ऑफिस के ठीक सामने घटिया ईंटों से निर्माण, ठेकेदार को किसी का खौफ नहीं ?

 

जौनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी के कार्यालय के ठीक सामने ही निर्माणाधीन भवन में घटिया ईंटों के इस्तेमाल का मामला सामने आने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस कलेक्ट्रेट परिसर से जिलेभर के विकास कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का संदेश जाता है, वहीं खुलेआम मानकों की अनदेखी का आरोप लगना जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगा रहा है।


कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम मीटिंग हाल के बगल में नए एनआईसी भवन का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण स्थल पर इस्तेमाल की जा रही ईंटों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि भवन निर्माण में मानक के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण ईंटों के बजाय घटिया ईंटों का प्रयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर ईंटों की गुणवत्ता देखकर ही इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।


सबसे गंभीर बात यह है कि निर्माण कार्य जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक सामने चल रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब जिला मुख्यालय के सबसे महत्वपूर्ण परिसर में ही निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो जिले के दूर-दराज गांवों में कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी किस तरह होती होगी?


डीएम की नजरों के सामने निर्माण, फिर भी मानकों की अनदेखी?

कलेक्ट्रेट परिसर में होने वाले निर्माण कार्य पर आम लोगों के साथ-साथ अधिकारियों की भी नजर रहती है। इसके बावजूद यदि निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो यह जांच का विषय है। आखिर निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार द्वारा सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की जा रही है? क्या निर्माण में इस्तेमाल होने वाली ईंटों और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जा रही है या फिर कागजों पर ही सब कुछ मानक के अनुरूप मान लिया जा रहा है?


गांवों के विकास कार्यों पर भी उठेगा सवाल

कलेक्ट्रेट में निर्माणाधीन भवन की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों ने जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की निगरानी पर भी बहस छेड़ दी है। यदि जिला मुख्यालय पर ही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायत सामने आती है तो गांवों में बनने वाली सड़क, नाली, भवन और अन्य सरकारी परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता की जांच कितनी गंभीरता से होती होगी, यह बड़ा सवाल है।


फिलहाल निर्माणाधीन एनआईसी भवन में इस्तेमाल हो रही ईंटों की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। जांच के बाद ही यह सामने आएगा कि निर्माण में मानकों का पालन हो रहा है अथवा गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सवाल यह भी है कि जिलाधिकारी कार्यालय के ठीक सामने चल रहे इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की नजर आखिर इन ईंटों पर कब पड़ेगी?


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