दस साल बाद भी जिंदा है राजेश की शहादत, भकुरा में गूंजे भारत माता के जयकारे
पूर्व सैनिक संगठन ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, बोले—देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वीरों का बलिदान सदैव रहेगा अमर
जौनपुर। उरी के आतंकी हमले में देश की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले भकुरा गांव के वीर सपूत शहीद राजेश सिंह की 10वीं शहादत दिवस पर शुक्रवार को पूरा गांव देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आया। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों के जोशीले गगनभेदी नारों से भकुरा की धरती गूंज उठी। श्रद्धांजलि सभा में पूर्व सैन्य अधिकारियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और ग्रामीणों ने शहीद राजेश सिंह की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान वातावरण उस समय और भावुक हो उठा, जब शहीद की शहादत को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। मौके पर शहीद सैनिकों के सम्मान में यह पंक्तियां भी गूंज उठीं—
“शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,
वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।
जो देश के लिए मर गए, वे मौत से नहीं डरते,
तिरंगे में लिपटकर भी सदा दिलों में जिंदा रहते।”
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता राष्ट्रीय पीजी कॉलेज जमुहाई के प्रबंधक एवं पूर्व ब्लाक प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह ने की। विशिष्ट अतिथि सम्यक कुमार आइपीएस और उप जिलाधिकारी सदर योगिता सिंह ने शहीद राजेश सिंह की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
मालूम हो कि सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भकुरा गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद सिंह के पुत्र राजेश सिंह 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी में देश की रक्षा करते हुए आतंकवादी हमले में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की 10वीं बरसी पर गांव में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद के पिता राजेंद्र सिंह, पत्नी जूली सिंह और बड़े भाई राकेश सिंह पिंटू सहित अतिथियों द्वारा शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
‘जब हम चैन से सोते हैं, जवान सीमा पर पहरा देते हैं’
विशिष्ट अतिथि आइपीएस सम्यक कुमार ने कहा कि जब हम कड़ाके की ठंड में अपने घरों में चैन की नींद सोते हैं, उस समय हमारे जवान सीमा पर मुस्तैदी से देश की रक्षा में डटे रहते हैं। भकुरा की धरती को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि शहीद राजेश सिंह की शहादत ने इस धरती को धन्य कर दिया है। ऐसे वीर सपूतों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
एसडीएम सदर योगिता सिंह ने कहा कि समाज में हम जिस भी भूमिका में कार्य कर रहे हैं, यदि हमें भारत माता की सेवा करने का अवसर मिला है तो उसे पूरी तन्मयता और क्षमता के साथ निभाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब देश का जवान किसी ऑपरेशन पर निकलता है तो वह सिर पर कफन बांधकर निकलता है। देश के लिए प्राणों की आहुति देने का जज्बा अचानक पैदा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे माता-पिता की परवरिश और संस्कारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बचपन से ही परिवार बच्चों में देश के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना पैदा करता है।
‘शहीद का परिवार कभी अकेला नहीं’
सभा की अध्यक्षता कर रहे पूर्व ब्लाक प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि जब कोई सैनिक शहीद होता है तो सबसे अधिक पीड़ा उसकी मां को होती है। परिवार के लिए वह वीर सपूत हमेशा यादों में जीवित रहता है। उन्होंने कहा कि शहीदों का बलिदान पूरे समाज की धरोहर है। उन्होंने शहीद परिवार के साथ लगातार खड़े रहने वाले अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों की सराहना की।
मां दुर्गा जी विद्यालय सिद्धपुर के संस्थापक एवं भाजपा नेता सूर्य प्रकाश सिंह मुन्ना ने कहा कि देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले ऐसे जांबाज सिपाही की शहादत पर पूरे देश को गर्व है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह शहीद परिवार के साथ हमेशा खड़ा रहे। उन्होंने कहा कि यदि शहीद परिवार के किसी काम आ सकें तो यह उनके लिए सौभाग्य की बात होगी।
शहीद के पिता राजेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों, पूर्व सैनिकों, ग्रामीणों और आगंतुकों के प्रति आभार जताया। कार्यक्रम का संचालन एक्स मिलिट्री मैन डीके सिंह एवं पत्रकार राजकुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय पूर्व सैनिक संगठन जौनपुर के अध्यक्ष केके सिंह, महासचिव देवेंद्र सिंह, बलराम सिंह, राम सूरत यादव, दिनेश कुमार सिंह, लाल चंद्र मौर्य, पन्नालाल, बलवंत गुप्ता, राकेश सिंह, सुनील शुक्ला, अभिमन्यु मौर्य, राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय, इंदु प्रकाश सिंह, संदीप कुमार, राजेंद्र प्रसाद, रिशु सिंह, राजेश मिश्रा, नन्हे सिंह, अभिमन्यु सिंह, विनोद सिंह मुन्ना, सोनू सिंह, गोपाल सिंह, रवि सिंह, मनीष राय सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और शहीद राजेश सिंह को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
शहीद राजेश सिंह की स्मृति में भकुरा की धरती पर उमड़ा यह जनसैलाब एक बार फिर संदेश दे गया कि देश की सीमाओं की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सपूत भले ही शरीर से हमारे बीच न हों, लेकिन उनका साहस, त्याग और बलिदान हमेशा देशवासियों के दिलों में जीवित रहेगा।

