आंखों में आंसू, दिल में यादें... प्रधानाचार्य अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव को चित्रांश समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
चित्रांश बंधुओं ने याद किया व्यक्तित्व व कृतित्व, शिक्षा जगत में योगदान को बताया अविस्मरणीय
जौनपुर। कायस्थ कल्याण समिति की ओर से नगर के परमानतपुर मोहल्ले में मैहर देवी मंदिर के पास स्थित आरके पैलेस में बुधवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इसमें बड़ी संख्या में चित्रांश बंधुओं ने स्वर्गीय अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव, प्रधानाचार्य को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका निधन समाज और शिक्षा जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि स्व. अखिलेश चंद्र श्रीवास्तव सरल, सहज और मिलनसार स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विद्यार्थियों के प्रति उनका स्नेह और शिक्षकों एवं समाज के लोगों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार हमेशा याद किया जाएगा। उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और सामाजिक सरोकार का अद्भुत समन्वय था। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर नमन किया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय श्रीवास्तव ने अपने व्यवहार और कार्यों से समाज में अलग पहचान बनाई। वह सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते थे और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उनके निधन से परिवार के साथ ही कायस्थ समाज और उनके परिचितों में गहरा शोक है। सभा में उपस्थित लोगों ने उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।
श्रद्धांजलि सभा में आरडी श्रीवास्तव, प्रदीप श्रीवास्तव डीओ, प्रदीप श्रीवास्तव ऑडिट अधिकारी, डॉ. रवि श्रीवास्तव, ज्ञानचंद श्रीवास्तव, भालेन्द्र श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, हैप्पी गिरिवर अस्थाना, अजय श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, राजन श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव, गिरजेश श्रीवास्तव, दयाल सरन, रवि श्रीवास्तव, डॉ. संजय, विपनेश कुमार श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव, जयप्रकाश, आलोक कुमार श्रीवास्तव, आलोक रंजन सिन्हा, शेखर श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव पत्रकार, राकेश श्रीवास्तव पूर्व प्रशासनिक अधिकारी, अनूप सिन्हा सहित बड़ी संख्या में चित्रांश बंधु मौजूद रहे।

