सफाई कर्मचारी बने साहबों के रसोइया और ड्राइवर, मंत्री से लेकर आलाधिकारी तक लगा रहे झाड़ू!

सरकारी वेतन सफाई का, ड्यूटी निजी सेवा की; गलियों की गंदगी के बीच ‘स्वच्छता ही सेवा’ का अभियान

जौनपुर। जिस काम के लिए सफाई कर्मचारियों की तैनाती की गई, अगर वही कर्मचारी साहबों की सेवा में लग जाएं तो शहर और गांवों की सफाई व्यवस्था का क्या हाल होगा? जौनपुर में इन दिनों यही सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि सफाई व्यवस्था के लिए तैनात कर्मचारियों में कुछ को अधिकारियों के यहां रसोइया तो कुछ को वाहन चालक के रूप में लगाया गया है। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत मंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश देते नजर आए।

सरकारी खजाने से सफाई कर्मचारियों के वेतन पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होते हैं। इनकी तैनाती शहर की सड़कों, गली-मोहल्लों और ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था के लिए की गई है। लेकिन सूत्रों के अनुसार कलेक्ट्रेट से लेकर विकास भवन तक कई कार्यालयों में सफाई कर्मचारियों से उनके मूल काम के बजाय दूसरे कार्य लिए जाने की चर्चा है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी अधिकारियों के यहां घरेलू काम, खाना बनाने और वाहन चलाने तक में लगाए गए हैं।

सफाई कर्मचारियों के कथित रूप से मूल कार्य से हटाए जाने का सीधा असर सार्वजनिक सफाई व्यवस्था पर पड़ने का सवाल उठ रहा है। शहर के कई मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में नियमित सफाई को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। ऐसे में सवाल है कि जब सफाई कर्मचारी ही अपने निर्धारित काम पर नहीं होंगे तो स्वच्छ और सुंदर जौनपुर कैसे बनेगा?

सूत्रों के मुताबिक सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं के कार्यालयों और आवासों में भी सफाई कर्मचारियों से सेवाएं लिए जाने की चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि ऐसा हो रहा है तो सरकारी कर्मचारियों को निजी कार्यों में लगाए जाने की व्यवस्था पर जिम्मेदार अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान चलाया गया। इसी क्रम में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण गिरीश चंद्र यादव ने हनुमान घाट पर स्वच्छता अभियान में सहभागिता की। इस दौरान नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष मनोरमा मौर्य, जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन. समेत अधिकारी, जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

मंत्री ने कहा कि स्वच्छ एवं सुंदर जौनपुर के निर्माण के लिए स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जन-जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

लेकिन इसी अभियान के बीच व्यवस्था पर सवाल भी उठ रहा है—एक तरफ मंत्री और डीएम समेत जिम्मेदार लोग हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छता का संदेश दे रहे हैं, दूसरी तरफ आरोप है कि जिन कर्मचारियों की जिम्मेदारी रोजाना सफाई की है, उनमें से कुछ साहबों की रसोई और गाड़ी संभालने में लगे हैं।

झाड़ू की फोटो से नहीं, व्यवस्था बदलने से आएगी सफाई

स्वच्छता अभियान के तहत कुछ देर झाड़ू लगाकर लोगों को संदेश देना अपनी जगह है, लेकिन स्थायी सफाई व्यवस्था के लिए जरूरी है कि सफाई कर्मचारियों को उनके मूल दायित्व पर लगाया जाए। अब सवाल यही है कि क्या जिला प्रशासन सफाई कर्मचारियों की तैनाती और उनके वास्तविक कार्यों की जांच कराएगा? यदि सरकारी वेतन पाने वाले सफाई कर्मचारी निजी कार्यों में लगाए जा रहे हैं तो जिम्मेदारी तय होगी या फिर स्वच्छता अभियान की तस्वीरों के बीच यह सवाल दबकर रह जाएगा?

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  1. ये दिखाने से कुछ नहीं होगा हर गली के सामने जो गंदगी है...........व..

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  2. Gaon k safai karmi aur adhikari me koi antar nhi

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