जन्नत में जहन्नुम का नजारा देखना है तो आइए मछलीशहर के इस गांव में!
सरकारी कूड़ाघर बना शोपीस, बेलाल मस्जिद और अंसारी बस्ती के बीच खाली जमीन पर लगा कूड़े का पहाड़
मछलीशहर। विकास के नाम पर गांवों में बनाए गए सरकारी कूड़ाघर अगर इस्तेमाल ही न हों तो उन्हें बनाने पर खर्च हुआ पैसा सवालों के घेरे में आ जाता है। इसकी तस्वीर विकास खंड मछलीशहर के बरांवा गांव में साफ नजर आ रही है। यहां सरकारी कूड़ाघर के बजाय बेलाल मस्जिद और अंसारी बस्ती के बीच खाली जमीन पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है। कई दिनों से जमा कूड़े के ढेर से उठती दुर्गंध आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक खाली जमीन पर लगातार कूड़ा फेंके जाने से स्थिति बदतर होती जा रही है। मैदान में जगह-जगह कूड़े के ऊंचे ढेर दिखाई दे रहे हैं। इससे निकलने वाली दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि लंबे समय से कूड़ा जमा होने के बावजूद उसके निस्तारण के लिए जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं।
बरांवा गांव की स्थिति सरकारी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब गांव का कूड़ा सरकारी कूड़ाघर में जाना चाहिए तो फिर खाली जमीन पर खुले में कूड़ा क्यों डाला जा रहा है? और यदि गांव में कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था ही नहीं होनी थी तो सरकारी कूड़ाघर के निर्माण पर खर्च किए गए धन का क्या औचित्य है?
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि विकास खंड मछलीशहर के कई गांवों में पिछले तीन-चार वर्षों में बनाए गए कूड़ाघर आज भी खाली पड़े हैं और उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि कूड़ाघर बनाकर उन्हें शोपीस बनाने से गांवों में स्वच्छता अभियान का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
बरांवा में खाली जमीन पर जमा कूड़े का अंबार न सिर्फ स्वच्छता व्यवस्था की पोल खोल रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस कूड़े का निस्तारण कब कराता है और सरकारी कूड़ाघर का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।


Har jagah ka yahi haal h
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