सीवर लाइन की खुदाई बनी आफत, दुर्गा पंडाल के बीचोंबीच गहरा गड्ढा
रामलीला मैदान हुसैनाबाद के सामने हादसे को दावत दे रहा खुला होल, जान जोखिम में डालकर पंडाल सजा रहे कारीगर
जौनपुर। शहर में सीवर लाइन बिछाने के नाम पर खोदी गई सड़कें अब राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए मुसीबत का सबब बनती जा रही हैं। दुर्गा पूजा और रामलीला के आयोजनों को लेकर जहां शहर में उत्साह का माहौल है, वहीं रामलीला मैदान हुसैनाबाद के सामने सड़क की बदहाल स्थिति और पंडाल के बीचोंबीच बना गहरा गड्ढा किसी बड़े हादसे को न्योता दे रहा है। हालात यह हैं कि पंडाल सजाने वाले कारीगर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर हैं।
रामलीला मैदान के सामने दुर्गा पूजा के लिए बनाए जा रहे पंडाल के बीचोंबीच सीवर लाइन की खुदाई के बाद गहरा होल छोड़ दिया गया है। पंडाल का ढांचा खड़ा करने से लेकर सजावट तक का काम इसी जोखिम भरे स्थान के आसपास चल रहा है। नीचे गहरा गड्ढा और ऊपर पंडाल की तैयारियों के बीच काम करने वाले कारीगरों को हर कदम बेहद संभलकर उठाना पड़ रहा है।
पंडाल में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब, जिम्मेदारों की नींद कब खुलेगी?
सबसे बड़ी चिंता यह है कि दुर्गा पूजा शुरू होते ही यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। शाम से लेकर देर रात तक महिला, पुरुष और बच्चे दर्शन-पूजन के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में यदि खुले गड्ढे को तत्काल नहीं ढका गया अथवा उसके चारों तरफ मजबूत बैरिकेडिंग नहीं की गई तो भीड़ के बीच किसी के उसमें गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीवर लाइन के लिए सड़कें खोदना तो जरूरी हो सकता है, लेकिन खुदाई के बाद सुरक्षा के इंतजाम नहीं करना लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है। जिस स्थान पर धार्मिक आयोजन होना है, वहां तो विशेष सतर्कता बरती जानी चाहिए थी। इसके बावजूद पंडाल के बीच में ही गहरा होल छोड़ दिया गया है।
सजावट नहीं, पहले जान बचाने की जद्दोजहद
पंडाल तैयार करने वाले कारीगरों के लिए भी स्थिति कम खतरनाक नहीं है। सजावट का सामान लेकर उन्हें इसी स्थान से होकर गुजरना पड़ रहा है। जरा सी चूक पैर फिसलने और गहरे गड्ढे में गिरने का कारण बन सकती है। रात में रोशनी और भीड़ बढ़ने के बाद खतरा और बढ़ जाएगा।
शहरवासियों ने संबंधित विभाग और नगर प्रशासन से मांग की है कि दुर्गा पूजा शुरू होने से पहले गड्ढे को तत्काल बंद कराया जाए। यदि तकनीकी कारणों से उसे बंद करना संभव नहीं है तो मजबूत बैरिकेडिंग, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी संकेत लगाए जाएं, ताकि कोई श्रद्धालु हादसे का शिकार न हो।
धार्मिक आस्था के इस बड़े आयोजन के बीच सड़क पर खुला गड्ढा सिर्फ बदहाली की तस्वीर नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की लापरवाही का खुला प्रमाण भी बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन किसी हादसे के बाद जागता है या उससे पहले ही इस खतरे को खत्म करता है।


