किसी की जिंदगी की कीमत पर पतंगबाजी नहीं! स्कूल पहुंचकर अधिवक्ता विकास तिवारी ने बच्चों को दिलाया संकल्प
जौनपुर में कीलर मांझे के खिलाफ अनोखी मुहिम, बच्चों ने कहा—न खुद इस्तेमाल करेंगे, न बिकने देंगे
जौनपुर। पतंग उड़ाने का शौक किसी की जिंदगी पर भारी न पड़े, किसी मां की गोद सूनी न हो और किसी परिवार की खुशियां मातम में न बदलें, इसी उद्देश्य से जौनपुर के अधिवक्ता विकास तिवारी ने प्रतिबंधित कीलर मांझे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान छेड़ रखा है। वह स्कूल-स्कूल पहुंचकर बच्चों को इस जानलेवा मांझे के खतरों से अवगत करा रहे हैं और सुरक्षित पतंगबाजी का संकल्प दिला रहे हैं। इसी क्रम में गुरुवार को वह राममूर्ति इंटर कॉलेज, गोपालपुर गजना पहुंचे, जहां विद्यार्थियों ने प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल न करने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने की शपथ ली।
बच्चे बने जानलेवा मांझे के खिलाफ जागरूकता के दूत
विद्यालय में बच्चों को संबोधित करते हुए विकास तिवारी ने कहा कि पतंगबाजी खुशियों और मनोरंजन का माध्यम है, लेकिन प्रतिबंधित मांझे का इस्तेमाल इसे जानलेवा बना सकता है। नायलॉन, चाइनीज, सिंथेटिक, नॉन-बायोडिग्रेडेबल, तात और सीसा लेपित मांझे की चपेट में आने से राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और बेजुबान पक्षियों की जान खतरे में पड़ सकती है।
उन्होंने बच्चों को समझाया कि सुरक्षित पतंगबाजी के लिए केवल सूती धागे का इस्तेमाल करें। बच्चों ने भी संकल्प लिया कि वे प्रतिबंधित मांझे से पतंग नहीं उड़ाएंगे। यदि आसपास या बाजार में कोई दुकानदार प्रतिबंधित मांझा बेचता दिखाई देगा तो वे अपने माता-पिता के माध्यम से पुलिस को इसकी सूचना देंगे।
मौत की घटनाओं ने झकझोरा, अब जागरूकता की बारी
जौनपुर में प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आने से शिक्षक संदीप तिवारी और चिकित्सक डॉ. समीर हाशमी की मौत की घटनाओं ने जिले को झकझोर दिया था। वहीं, वाराणसी में साड़ी कारोबारी की मांझे से गला कटने के कारण मौत की खबर सामने आई। गोरखपुर में रमेश कन्नौजिया की मौत ने भी इस खतरे की गंभीरता को उजागर किया।
इन दर्दनाक घटनाओं का जिक्र करते हुए विकास तिवारी ने बच्चों को बताया कि प्रतिबंधित मांझा केवल एक धागा नहीं, बल्कि दूसरों की जिंदगी के लिए गंभीर खतरा है। इसकी धार किसी भी राहगीर को निशाना बना सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल से दूर रहना और इसकी बिक्री के खिलाफ जागरूक रहना जरूरी है।
प्रशासन के साथ समाज की भागीदारी भी जरूरी
विकास तिवारी ने कहा कि प्रतिबंधित मांझे पर रोक लगाने के लिए केवल सरकारी आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं हैं। जब तक समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक इस खतरे पर प्रभावी अंकुश लगाना मुश्किल होगा। इसी सोच के साथ वह लगातार विद्यालयों में पहुंचकर बच्चों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि विद्यार्थी अपने परिवार और आसपास के लोगों तक सुरक्षित पतंगबाजी का संदेश पहुंचा सकें।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य किसी की खुशियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि पतंगबाजी के नाम पर किसी परिवार की खुशियां उजड़ने से बचाना है। बच्चे जागरूक होंगे तो परिवार जागरूक होंगे और परिवारों की जागरूकता से समाज में बदलाव आएगा।
विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन के सहयोग के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित मांझे के खतरों के प्रति व्यापक जनजागरूकता पैदा करने और इसके इस्तेमाल पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने की दिशा में उनका अभियान जारी रहेगा।
इस अवसर पर अभय मिश्र, अजय राय, बृजेश यादव, अंकित यादव, शिवराज यादव, सूरज राय और चन्द्रेश यादव सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

