लक्ष्मण को मूर्छित देख रामादल में पसरा सन्नाटा,राम का विलाप सुन दर्शकों की आंखें हुईं नम

 


जौनपुर। विकास खंड मछलीशहर के कुंवरपुर गांव में पिछले 141 वर्षों से चल रही एतिहासिक रामलीला के नौवें और आखिरी दिन लक्ष्मण शक्ति का मंचन किया गया। पर्दा उठने पर सर्वप्रथम भगवान राम द्वारा रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना कर शिवजी की पूजा कर सेतु निर्माण कर वानर भालुओं की सेना ले लंका पहुंचते हैं जहां वह अंगद को रावण के पास उसे समझाने को भेजते हैं लाख समझाने पर भी अंहकार में डूबा रावण समझौते के लिए नहीं तैयार होता है तब अंगद शक्ति परीक्षण के अपना पैर रावण की सभा में जमा देते हैं,जब रावण उनका पैर उठाने के लिए झुकता है तो अंगद अपना पैर उठा लेते हैं और उसे राम का चरण पकड़ने की सलाह देते हैं।आखिरी विकल्प के रूप में युद्ध शुरू हो जाता है। वानरों और राक्षसों के बीच भीषण युद्ध के दौरान मेघनाद लक्ष्मण पर शक्ति वाण मारता है लक्ष्मण के मूर्छित होते ही रामादल में सन्नाटा पसर जाता है। सुषेण वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी लाने जाते हैं इधर उनके आने में देर होने पर राम करुण विलाप करते हैं जिसे देख दर्शकों की आंखें भर जाती हैं। संजीवनी से लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त हो जाती है पूरा रामादल एक बार फिर से उत्साहित हो जाता है।राम के कुंभकर्ण वध के बाद लक्ष्मण मेघनाद का वध करते हैं और पर्दा आखिरी बार गिर जाता है। रामलीला के आखिरी दिन सचिन उपाध्याय ने राम, कुंदन पाण्डेय ने लक्ष्मण,विराट तिवारी ने भरत,नित्यानंद पाण्डेय ने हनुमान, गणेश पाठक ने अंगद, रणविजय सिंह ने रावण, जनार्दन सिंह ने मेघनाद, शिवम् पाठक ने जामवंत का अभिनय किया। समापन पर रामलीला समिति के अध्यक्ष गोविंद सिंह और कोषाध्यक्ष अश्विनी पाठक ने पात्रों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया।

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