आयुष्मान के नाम पर सरकार एवं मरीजों से लूट

 

सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। लेकिन क्या इस योजना का वास्तविक लाभ हर जरूरतमंद मरीजों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुँच रहा है? हाल ही में सामने आई कुछ शिकायतें इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। आज के समय में दवाइयां और बेहतर चिकित्सा सुविधा हर व्यक्ति की मूलभूत जरूरत बन चुकी हैं। बीमारी की स्थिति में आम आदमी सरकारी योजनाओं और अस्पतालों से राहत की उम्मीद करता है। इसी उद्देश्य से आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों को मरीजों के उपचार से जोड़ा गया है। मगर ज्यादातर अस्पतालों द्वारा अनाप-शनाप बिल बनाने की शिकायत आम बात हो चुकी है।


आयुष्मान कार्ड के बावजूद अतिरिक्त धन की मांग


कुछ मरीजों के परिजनों का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड के बावजूद उन्हें इलाज के दौरान अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। अस्पताल में भर्ती होने से पहले उन्हें बताया जाता है कि उनका इलाज आयुष्मान योजना के अंतर्गत होगा। लेकिन भर्ती होने के बाद कथित तौर पर अलग-अलग मदों के नाम पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाते हैं।

मरीज के परिजनों से कहा जाता है कि आयुष्मान योजना के तहत निर्धारित सीमा पूरी हो गई है, तो कभी यह बताया जाता है कि कोई विशेष जांच या उपचार योजना के पैकेज में शामिल नहीं है। कुछ मामलों में दवाइयां भी अस्पताल के बाहर से खरीदकर लाने के लिए कहे जाने की शिकायत सामने आई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि अस्पताल में इन अतिरिक्त भुगतानों के लिए मरीज के नाम पर कोई उचित बिल या रसीद उपलब्ध नहीं कराई जाती। भुगतान केवल नकद में करने को कहा जाता है।



दवाओं की कीमत को लेकर भी गंभीर शिकायत


अस्पतालों में दवाओं की कीमतों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं।

एक मरीज के परिजन ने बताया कि उपचार के दौरान कुछ ऐसी दवाएं अस्पताल की ओर से उपलब्ध कराई गईं, जिनकी कीमत बाजार में उपलब्ध समान किस्म की दवाओं की तुलना में काफी अधिक थी। आरोप है कि अस्पताल से उपलब्ध कराई गई कुछ दवाओं पर अत्यधिक कीमत अंकित थी और मरीज के परिजनों को उन्हें उसी कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ा।


योजना अच्छी लेकिन प्रभावी निगरानी नहीं 


आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज से जनता को काफी राहत मिली है। सरकार आम जनमानस को चिकित्सा में मदद के लिए आयुष्मान कार्ड के माध्यम से बड़ी राशि खर्च कर रही है। लेकिन योजना की सफलता केवल बजट या अस्पतालों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि मरीज को वास्तव में कितना लाभ मिल रहा है।

यदि किसी मरीज को आयुष्मान योजना के तहत इलाज मिल रहा है, तो उसे यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि कौन-सा उपचार योजना के अंतर्गत शामिल है?

 कौन-सी जांच या दवा पैकेज का हिस्सा है? मरीज से अतिरिक्त राशि क्यों ली जा रही है?अतिरिक्त भुगतान की वैध रसीद क्यों नहीं दी जा रही? अस्पताल को योजना के तहत सरकार से कितना भुगतान प्राप्त हुआ? मरीज से अलग से ली गई राशि का क्या हिसाब है? यदि आयुष्मान के जरिए इलाज के बिल की बारीकी से जांच हो तो इसकी पूरी सच्चाई सामने आ सकती है और सरकार के साथ मरीजों के भी पैसों की बचत होगी।

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