पैसा और प्रतिष्ठा बहुत दिया 'प्रभु' अब 'पावर' दीजिए

 

प्रमोद जायसवाल 

कमाई गई धन-दौलत का कुछ हिस्सा अगर परमार्थ और धर्मार्थ में खर्च हो तभी उसकी सार्थकता सिद्ध होती है।  सद्कर्मों के फल से मनुष्य जीवन भर प्रभावित रहता है। अपनी जन्मभूमि को कर्मभूमि बनाने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता एवं प्रमुख समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह का नाम परमार्थी और धर्मार्थी के रूप में आज हर किसी के जुबान पर है। दीन दुखियों और असहायों की मदद, उनके प्रति सेवा भाव तथा समर्पण के चलते उन्होंने काफी ख्याति अर्जित कर ली है। 

ज्ञान प्रकाश सिंह की जनपद में सक्रियता कोरोना काल से शुरू हुई। कोरोना काल में उन्होंने लगातार लोगों की मदद की। ढाई माह तक पीड़ितों में भोजन के पैकेट वितरित किया। जरुरत मंदों को दवा, आक्सीजन आदि मुहैया कराया। गरीबों, असहायों आदि की मदद का सिलसिला तब से आज तक अनवरत जारी है। गोधना स्थित उनके 'कैलाशपति' आवास से आजतक कोई भी जरुरतमंद खाली हाथ नहीं वापस लौटा है। वह दर्जनों निर्धन बेटियों के साथ पीले करने में मददगार बने हैं। जीर्ण शीर्ण अवस्था में पड़े लीलावती अस्पताल का जीर्णोद्धार कराकर उसे अत्याधुनिक सुविधाओं और मशीनों से लैस किया। अति प्राचीन सीतापुर आंख अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए कीमती मशीनें मुहैया कराई। भंडारी और सिटी स्टेशन पर दिव्यांग जन के लिए व्हील चेयर्स की व्यवस्था की। समय समय पर वृद्धाश्रम तथा रचना विशेष विद्यालय में डीप फ्रीजर, इनवर्टर, कम्प्यूटर आदि जरुरी सामान उपलब्ध कराया है। 

समाज सेवा के साथ वह धार्मिक कार्यों में भी अग्रणी हैं। वर्ष 2023 और 2024 में नगर में भव्य आयोजन कर जनपदवासियों को रामकथा का रसपान कराया। बीआरपी कालेज के मैदान पर रामकथा के फिर भव्य आयोजन को लेकर वह इन दिनों सुर्खियों में है। अपने सेवा कार्यों से ज्ञानप्रकाश सिंह ने इतनी प्रसिद्धि हासिल कर ली है कि कोई भी धार्मिक और सामाजिक आयोजन बगैर उनके सहयोग और मौजूदगी के पूर्ण नहीं होता। सभी स्वयंसेवी और सामाजिक संगठन अपने कार्यक्रमों में ज्ञान प्रकाश सिंह को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने को लालायित रहते हैं। 


'जनसेवक' के बाद 'जननायक' बनने की चाह


सामाजिक कार्यों के बलबूते 'प्रमुख समाजसेवी' और 'जनसेवक' की उपाधि हासिल करने के बाद ज्ञान प्रकाश सिंह ने बीजेपी का दामन थामकर राजनीति में कदम रखा। पार्टी के प्रति समर्पण और सहयोग के चलते आज उनकी गिनती भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में की जाती है। अगर वह चुनावी समर में उतरते हैं तो समाज सेवा के जरिए अर्जित लोकप्रियता का फल वोटों के रुप में उनकी झोली में बड़ी संख्या में गिर सकता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि अगर वह निर्दल प्रत्याशी के रुप में भी चुनाव में उतर जाएं तो उन्हें अपने बलबूते दस से पन्द्रह हजार वोट मिल सकते हैं। भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में ज्ञान प्रकाश सिंह का भी नाम प्रमुखता से शामिल है। आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी से अगर टिकट नहीं मिला तो उसकी एक सहयोगी पार्टी उन्हें जफराबाद से अपना उम्मीदवार घोषित कर सकती है। चुनाव के माहौल के बीच 21अक्टूबर से आयोजित होने वाली भव्य रामकथा के सहारे उनके  'चुनावी वैतरणी' को पार करने  की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।

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