सुंदरकाण्ड के सस्वर पाठ से भक्तिमय हुआ मृत्युञ्जय महादेव धाम, मातृशक्ति की प्रस्तुति ने मोहा मन
मां सीता गायन मंडली की महिलाओं ने सुर-लय और भक्ति से बांधा समां, छह प्रतिभागियों को अंगवस्त्र देकर किया गया सम्मानित
जौनपुर। उमरछा स्थित मृत्युञ्जय महादेव धाम में प्रदोष के पावन अवसर पर श्रीरामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का सस्वर पाठ एवं मातृशक्ति प्रतियोगिता का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में किया गया। मां सीता गायन मंडली, उमरछा की महिलाओं ने अपनी मधुर वाणी, सुर-लय और भावपूर्ण संगीतमय प्रस्तुति से ऐसा भक्तिमय समां बांधा कि पूरा धाम रामभक्ति से सराबोर हो उठा।
कार्यक्रम का शुभारंभ पंडित हीरामणि उपाध्याय एवं पंडित रघु श्रेय मिश्र ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम, माता सीता और संकटमोचन हनुमान जी के विधिवत पूजन-अर्चन से कराया। इसके बाद मां सीता गायन मंडली की मातृशक्ति ने सुंदरकाण्ड का सस्वर पाठ प्रारंभ किया। चौपाइयों और भक्ति गीतों की मधुर प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम के समापन पर सुंदरकाण्ड की प्रस्तुति देने वाली सरोज उपाध्याय, ज्योति शुक्ल, तृप्ति उपाध्याय, रिया उपाध्याय, शिवानी सिंह और आरती गौड़ को कार्यक्रम व्यवस्थापक सुशील कुमार उपाध्याय ने अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर सुशील कुमार उपाध्याय ने कहा कि सुंदरकाण्ड केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास, साहस, सेवा, समर्पण और सकारात्मक सोच का संदेश देने वाला प्रेरणादायी प्रसंग है। हनुमान जी का चरित्र हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का कोई स्थान नहीं होता। अपनी शक्ति और सामर्थ्य को प्रभु के कार्य तथा समाज की सेवा में समर्पित करना ही सच्ची भक्ति है।
उन्होंने कहा कि प्रदोष के अवसर पर मृत्युञ्जय महादेव धाम में आयोजित यह आयोजन महज प्रतियोगिता नहीं, बल्कि मातृशक्ति की प्रतिभा को सम्मान देने, धार्मिक चेतना जागृत करने और रामचरितमानस के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का विनम्र प्रयास है। महिलाओं द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाना नई पीढ़ी में संस्कारों के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि श्रीरामचरितमानस में सुंदरकाण्ड का विशेष स्थान है। इसमें पवनपुत्र हनुमान की भक्ति, शक्ति, बुद्धिमत्ता, साहस और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट निष्ठा का अद्भुत वर्णन मिलता है। सुंदरकाण्ड का संदेश है कि जीवन में कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, यदि मन में प्रभु के प्रति विश्वास, लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और कर्म के प्रति समर्पण हो तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुंदरकाण्ड के नियमित पाठ और श्रवण से मन में सकारात्मकता, धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक शांति का भाव विकसित होता है। हनुमान जी का जीवन हमें अपनी शक्ति का उपयोग सेवा, परोपकार और धर्म की रक्षा के लिए करने की प्रेरणा देता है।
इस अवसर पर रमाशंकर उपाध्याय, सुधाकर शुक्ल, लालमुनि उपाध्याय, कपिल मुनि मिश्र, सागर शुक्ल, लालजी गौड़, सुरेश उपाध्याय, सूर्यनाथ शुक्ला, अशोक शुक्ल, अरविंद शुक्ल, ढोलन, अभिषेक उपाध्याय, विकास शुक्ल एवं विनोद शुक्ल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

