खाली हाथ ही गया था , दुनिया से सिकंदर
https://www.shirazehind.com/2013/09/blog-post_1076.html
डॉ अ कीर्तिवर्धन
उन लोगों के नाम एक पैगाम ----- जो खुद को खुदा समझते हैं , जो देश के रहनुमा बनते हैं , कराते हैं दंगे , सकते हैं रोटियाँ , लाशों पर वोट की बिसात रचते हैं । --------- लिखा था कभी हाथ पे ,सिकंदर ने मुकद्दर , हो गया था गुरुर उसको , होने का कलंदर । मिट गया था अहम् ,एक फ़क़ीर की बात से , खाली हाथ ही गया था , दुनिया से सिकंदर ।
उन लोगों के नाम एक पैगाम ----- जो खुद को खुदा समझते हैं , जो देश के रहनुमा बनते हैं , कराते हैं दंगे , सकते हैं रोटियाँ , लाशों पर वोट की बिसात रचते हैं । --------- लिखा था कभी हाथ पे ,सिकंदर ने मुकद्दर , हो गया था गुरुर उसको , होने का कलंदर । मिट गया था अहम् ,एक फ़क़ीर की बात से , खाली हाथ ही गया था , दुनिया से सिकंदर ।
