आखिर कब तक बलात्कारी दामिनियों के भाग्य का फैसला करते रहेंगे? : डा. वीपी सिंह
https://www.shirazehind.com/2013/09/blog-post_12.html
जौनपुर। आखिर कब तक बलात्कारी देश की दामिनियों के भाग्य का फैसला करते रहेंगे कि उनको किस पेड़ पर लटकाया जाय या देश-विदेश के किस अस्पताल में ले जाकर मारा जाय? जिस देश में 3 साल तक की अबोध बच्ची के साथ बलात्कार होता हो, वहां इस विषय को लेकर बहस का मुद्दा प्यार नहीं, बल्कि व्यभिचार होना चाहिये। उक्त बातें सामाजिक दृष्टिकोण पर बनी हिन्दी फीचर फिल्म ‘गार्जियन्स’ के निर्माता एवं अभिनेता डा. विनोद प्रसाद सिंह ने गुरूवार को एक भेंट के दौरान कही। उन्होंने कहा कि खाप पंचायत तो प्यार करने वालों को फांसी पर चढ़ाने की बात करती है लेकिन सजा देने वाले स्वयं अपनी अन्तरात्मा से पूछें कि उनमें से कौन ऐसा है जो व्यभिचारी नहीं है। शीघ्र ही रिलीज होने वाली फिल्म के अभिनेता डा. सिंह का कहना है कि औरत के पास यदि सबसे सुन्दर कुछ होता है तो वह उसका शरीर नहीं, बल्कि उसका दिल है, उसका प्यार है जो वह किसी बलात्कारी को कभी नहीं देती।मांस को नोंचने वाले भेडि़ये व कुत्ते हो सकते हैं, मगर इंसान नहीं। बीते 16 दिसम्बर को देश की राजधानी दिल्ली में चलती बस में एक युवती के साथ किये गये गैंगरेप प्रकरण के फैसला सुनाये जाने की पूर्व संध्या पर डा. सिंह ने कहा कि क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि सजा उम्र के हिसाब से नहीं, बल्कि अपराध की गम्भीरता के हिसाब से देनी चाहिये। जो बलात्कार कर सकता है, वह बालिग है। चाहे उसकी उम्र जो भी हो। इस पर बालिग एवं नाबालिग को लेकर बहस नहीं करनी चाहिये, क्योंकि यदि कोई नाबालिग है तो उससे अपराध नहीं हो सकते हैं। अपराध करने वाला बालिग होता है। अपने घर की इज्जत को बुरी नजर से बचाने के लिये लोगों को जागरूक होना होगा जिसके लिये सामाजिक बुराइयों से युद्ध करना होगा। यह युद्ध हम सबको मिलकर लड़ना होगा। युद्ध के लिये अर्जुन को स्वयं सामने आना होगा, क्योंकि इसके लिये हर बार श्रीकृष्ण जन्म नहीं लेंगे। बलात्कार, गैंगरेप, हत्या जैसे जघन्य अपराध के लिये कानून को ठोस एवं कड़े फैसले लेने होंगे तभी समाज एवं परिवार सुरक्षित रहेगा।
