यहाँ कानून का नही कोतवाल का चलता है राज ?

शहर कोतवाली के  प्रभारी की मंशा से दर्ज होती है प्राथमिकी
    जौनपुर। यह कोतवाली जौनपुर है। यहां कानून की मंशा नहीं, बल्कि कोतवाल की मंशा से दर्ज होती है प्राथमिकी। तहरीर को दरकिनार कर लिख दिया जाता है कि एनसीआर। मुंशी कह देता है कि ऐसा है बड़े साहब का आदेश। मेडिकल आने के बाद आप तहरीर लेकर आइये। तब देखा जायेगा। पुलिस की इस कार्यप्रणाली से पीडि़त जनता जहां परेशान है, वहीं उसके बोर्ड पर लिखा यह शब्द ‘सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिये तत्पर कोतवाली पुलिस’ अर्थहीन हो गयी है। बीते रविवार को रात लगभग साढ़े 7 बजे शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला मण्डी अहमद खां कुछ मनबढ़ और दबंग लोगों ने बच्चों के विवाद में घर में घुसकर राजेन्द्र मौर्य 36 वर्ष पुत्र वीरेन्द्र मौर्य को जहां लाठी-डण्डे से मारपीट कर बुरी तरह से जख्मी कर दिया, वहीं घर का सामान नष्ट करने के साथ उसके गले में पड़ी सोने की चेन भी छीन लिया। भुक्तभोगी ने कोतवाली पहुंचकर आपबीती सुनाते हुये लिखित तहरीर दिया लेकिन उसके विरूद्ध उसे पकड़ा दिया गया मौखिक सूचना का एनसीआर।


घायल का उपचार जिला चिकित्सालय में हुआ जहां हाथ में चोट, सिर टूटा एवं दांत टूटने की पुष्टि चिकित्सकों ने किया। घायल के परिजन कोतवाली पुलिस से उचित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करने की लिखित तहरीर देकर निवेदन करते रह गये लेकिन आज तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, बल्कि पुलिस ने खानापूर्ति के लिये घटना के ही दिन 3 लोगों को गिरफ्तार कर धारा 151 के तहत जेल भेज दिया। जहां एक तरफ पुलिस महकमा जनता के बीच विश्वास जगाने के लिये फ्लैग मार्च सहित पुलिस मित्र तक बनाने में व्यस्त है, वहीं दूसरी तरफ शहर कोतवाली का यह कृत्य चर्चा का विषय बना हुआ है। धारा 151 में जमानत से रिहा होने के बाद मनबढ़ों का मन इतना बढ़ गया कि पीडि़त परिवार के दरवाजे पर जाकर अपशब्दों का प्रयोग करते हुये पुनः ललकार रहे हैं कि अब तो हमें मालूम हो गया है कि बहुत होता है रात भर कोतवाली में बैठना और सुबह न्यायालय से जमानत। इससे ज्यादा पुलिस और कानून क्या कर सकता है?

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