मासूम छात्रो के सिर पर मौत के बदल !
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जौनपुर जिले के शाहगंज कस्बे में चल रहे प्राथमिक
स्कूल के करीब 200 छात्रो के सिर पर मौत का बादल मडरा रहा है। किसी अनहोनी
के डर से बच्चे बारिश के दिनों में स्कूल आना ही छोड़ देते है। दरअसल इस
स्कूल से सटा मुगलो के ज़माने का खडहर तब्दील हो चूका एक बिल्डिंग। इस
बिल्डिग का मलबा अक्सर गिरकर विद्यालय या आस पास गिर जाता है। 2006 में
इसके मलबे की चपेट में आने से एक बच्चे की दर्दनाक मौत हो चुकी है इसके बाद
भी इस खडहर को गिराया नही जा सका है।
जौनपुर जिले के शाहगंज कस्बे में यूपी सरकार द्वारा उर्दू माध्यम प्राथमिक विद्यालय चलाया जाता है। इस विद्यालय में कुल 180 छात्र शिक्षा ले रहे है। इनके पढ़ाई और जिंदगी के लिए खलनायक साबित हो रहा है यह खडहर में तब्दील हो चुकी मुगल बादशाहो के द्वारा बनाई गई यह ईमारत। इस जर्जर भवन का मलबा अकसर विद्यालय व आसपास गिरता रहता है। यह मलबा एक छात्र का कब्र बना चुकी है और दर्जन भर छात्र जख्मी हो चुके है। छात्र हमेशा डरे सहमे रहते है। अभिभावक भी अपने बेटो के घर सुरक्षित लौटने पर ही राहत की सांस लेते है।
छात्रो से कही ज्यादा उनको तालीम देने शिक्षक भयभीत रहते है। उनका रोना है कि हमलोगो ने कई पत्र बीएसए कार्यालय, एसडीएम और डीएम को लिखा लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नही हुई जिसके कारण स्कूल में पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले शिक्षको की जान हमेशा शासत में रहती है।
जौनपुर जिले के शाहगंज कस्बे में यूपी सरकार द्वारा उर्दू माध्यम प्राथमिक विद्यालय चलाया जाता है। इस विद्यालय में कुल 180 छात्र शिक्षा ले रहे है। इनके पढ़ाई और जिंदगी के लिए खलनायक साबित हो रहा है यह खडहर में तब्दील हो चुकी मुगल बादशाहो के द्वारा बनाई गई यह ईमारत। इस जर्जर भवन का मलबा अकसर विद्यालय व आसपास गिरता रहता है। यह मलबा एक छात्र का कब्र बना चुकी है और दर्जन भर छात्र जख्मी हो चुके है। छात्र हमेशा डरे सहमे रहते है। अभिभावक भी अपने बेटो के घर सुरक्षित लौटने पर ही राहत की सांस लेते है।
छात्रो से कही ज्यादा उनको तालीम देने शिक्षक भयभीत रहते है। उनका रोना है कि हमलोगो ने कई पत्र बीएसए कार्यालय, एसडीएम और डीएम को लिखा लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नही हुई जिसके कारण स्कूल में पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले शिक्षको की जान हमेशा शासत में रहती है।

