यातायात पुलिस वीआइपी ड्यूटी में ही पस्त
https://www.shirazehind.com/2013/12/blog-post_5371.html
जौनपुर : जनपद की यातायात पुलिस वीआइपी ड्यूटी में ही पस्त है। वजह 21
वीं सदी के जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए 30 साल पहले की
जनशक्ति है। इतना ही नहीं विभाग द्वारा वाहन की सुविधा नहीं दिए जाने से
पैदल निगहबानी करनी पड़ती है।
नगर में जाम के झाम से जनमानस त्राहि-त्राहि कर रहा है। इससे निजात के लिए सारे उपाय फेल हो जा रहे हैं। इस गतिरोध के चलते जहां मिनटों की दूरी घंटों में लोगों को तय करनी पड़ रही है वहीं त्वरित उपचार न हो पाने से तमाम लोग असमय काल के गाल में समा जा रहे हैं।
यातायात नियंत्रण के लिए संसाधनों पर गौर करें तो जिले में एक टीएसआइ, पांच हेड कांस्टेबल व 12 आरक्षियों की नियुक्ति की गई है। जबकि विभाग द्वारा दो हेड कांस्टेबिल व 10 आरक्षियों का पद तीन दशक पूर्व सृजित किया गया है। तैनात सिपाहियों में अधिकांश की मेला, वीआइपी ड्यूटी में लग जाती है। बमुश्किल दो या तीन चौराहों पर ही यातायात नियंत्रण हेतु पुलिस तैनात रहती है। जिले की जनसंख्या बढ़कर 42 लाख से पार और वाहनों का ओवरलोड दस गुना बढ़ गया है।
यातायात पुलिस के पास प्रदूषण की जांच हेतु चार स्मोक मीटर, काला शीशा की जांच हेतु एक टिंट मीटर, शराब पीकर वाहन चलाने वालों की चेकिंग हेतु चार ब्रेथ इनलाइजर व एक स्पीड राडार है। नगर के 20 चौराहों में अधिकांश पर जहां यातायात पुलिस नहीं है वहीं संकेतक के नाम पर 50 सेफ्टीबाल टार्च थमा दिया गया है। मजे की बात यह है कि इन उपकरणों के चौराहों पर ले जाने के लिए वाहन भी नहीं दिया गया है।
डिवाइडर की कोई व्यवस्था नहीं है। पालिटेक्निक चौराहे पर बोलार्ड कोन लगाकर काम चलाया जा रहा है तो अन्य स्थानों पर यह भी व्यवस्था नहीं है। बैरियर के नाम पर पचास बैरियर नगर कोतवाली, लाइन बाजार थाना व यातायात पुलिस के हिस्से में है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाइन बाजार से वाजिदपुर तिराहे तक एक साल पूर्व 400 रोड स्टड चिपकाया गया था। उसमें अधिकांश उखड़ गया है।
दुर्घटना रोकने के लिए वाजिदपुर तिराहा, लाइन बाजार व सेंट पैट्रिक स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर लगाया गया था, जो ओवरलोड वाहनों के भार को एक साल भी नहीं झेल पाया।
नगर में वन-वे के लिए व्यापार मंडल के सहयोग से कुछ दिन पूर्व प्रमुख स्थानों पर बैरियर लगाया गया था लेकिन दबंगों ने एक माह भी नहीं चलने दिया और पाइप उठाकर फेंक दिया।
नगर में जाम के झाम से जनमानस त्राहि-त्राहि कर रहा है। इससे निजात के लिए सारे उपाय फेल हो जा रहे हैं। इस गतिरोध के चलते जहां मिनटों की दूरी घंटों में लोगों को तय करनी पड़ रही है वहीं त्वरित उपचार न हो पाने से तमाम लोग असमय काल के गाल में समा जा रहे हैं।
यातायात नियंत्रण के लिए संसाधनों पर गौर करें तो जिले में एक टीएसआइ, पांच हेड कांस्टेबल व 12 आरक्षियों की नियुक्ति की गई है। जबकि विभाग द्वारा दो हेड कांस्टेबिल व 10 आरक्षियों का पद तीन दशक पूर्व सृजित किया गया है। तैनात सिपाहियों में अधिकांश की मेला, वीआइपी ड्यूटी में लग जाती है। बमुश्किल दो या तीन चौराहों पर ही यातायात नियंत्रण हेतु पुलिस तैनात रहती है। जिले की जनसंख्या बढ़कर 42 लाख से पार और वाहनों का ओवरलोड दस गुना बढ़ गया है।
यातायात पुलिस के पास प्रदूषण की जांच हेतु चार स्मोक मीटर, काला शीशा की जांच हेतु एक टिंट मीटर, शराब पीकर वाहन चलाने वालों की चेकिंग हेतु चार ब्रेथ इनलाइजर व एक स्पीड राडार है। नगर के 20 चौराहों में अधिकांश पर जहां यातायात पुलिस नहीं है वहीं संकेतक के नाम पर 50 सेफ्टीबाल टार्च थमा दिया गया है। मजे की बात यह है कि इन उपकरणों के चौराहों पर ले जाने के लिए वाहन भी नहीं दिया गया है।
डिवाइडर की कोई व्यवस्था नहीं है। पालिटेक्निक चौराहे पर बोलार्ड कोन लगाकर काम चलाया जा रहा है तो अन्य स्थानों पर यह भी व्यवस्था नहीं है। बैरियर के नाम पर पचास बैरियर नगर कोतवाली, लाइन बाजार थाना व यातायात पुलिस के हिस्से में है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाइन बाजार से वाजिदपुर तिराहे तक एक साल पूर्व 400 रोड स्टड चिपकाया गया था। उसमें अधिकांश उखड़ गया है।
दुर्घटना रोकने के लिए वाजिदपुर तिराहा, लाइन बाजार व सेंट पैट्रिक स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर लगाया गया था, जो ओवरलोड वाहनों के भार को एक साल भी नहीं झेल पाया।
नगर में वन-वे के लिए व्यापार मंडल के सहयोग से कुछ दिन पूर्व प्रमुख स्थानों पर बैरियर लगाया गया था लेकिन दबंगों ने एक माह भी नहीं चलने दिया और पाइप उठाकर फेंक दिया।

