किसानों को खुशहाल करने वाली योजना कागजों तक सिमटी

 जौनपुर। पूर्वांचल के जनपदों में खाद्यान्न की उत्पादकता व उत्पादन में वृद्धि कर किसानों को खुशहाल बनाने के लिये सरकार की जनकल्याणकारी योजना हरित क्रांति योजना इस समय कागजों तक ही सिमटती नजर आ रही है। योजनान्तर्गत किसानों को उनके खेतों पर सरकारी बजट से कृषि निवेशों को उपलब्ध करवाकर उन्नति तकनीक से कम लागत व अधिक उत्पादन वाली तकनीक का प्रदर्शन कराना, किसानों को अनुदान पर उन्नतिशील कृषि यंत्र उपलब्ध कराना तथा सिंचाई के लिये किसानों को निःशुल्क बोरिंग कराना है, ताकि खाद्यान्न की दृष्टि से देश आत्मनिर्भर हो सके। योजना का प्रचार-प्रसार खूब किया गया तो किसानों को लगा कि सिंचाई सुविधा हो जाने से उनकी उपज बढ़ जायेगी किन्तु विभागीय अधिकारियों की निष्क्रियता से योजना का लाभ पाने से किसान वंचित हो जा रहे हैं। खुटहन विकास खण्ड के 81 ग्राम पंचायतों से लगभग 200 किसान निःशुल्क बोरिंग के लिये महीनों से आवेदन कर ब्लाक का चक्कर लगा रहे हैं। बजट का अभाव बताकर उन्हें वापस कर दिया जाता है। इस समय रबी फसलों की सिंचाई का समय चल रहा है। ऐसे में किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो उन्हें आपेक्षिक उपज नहीं प्राप्त हो सकेगी। किसान अपने को ठगी का शिकार महसूस कर रहे हैं। इस सम्बन्ध मंे पूछे जाने पर सहायक विकास अधिकारी (लघु सिंचाई) झिंगुरी राम यादव ने बताया कि बजट के अभाव में निःशुल्क बोरिंग नहीं हो पा रही है। बजट आने पर बोरिंग करायी जायेगी। वहीं दूसरी ओर निःशुल्क बोरिंग न होने से किसानों मंे आक्रोश है।

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