 |
| FILE PHOTO |
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई महोत्सव में तीन सौ करोड़ से अधिक रूपये खर्च कर जहां विरोधियो को मौका दे दिया है वही जौनपुर की जनता और यहाँ के कलाकारो के कलेजे पर तीर मारने का काम किया है। दरअसल बीएसपी सरकार ने जौनपुर में विरासत महोत्सव होता था। इस महोत्सव के माध्यम से स्थानीय कलाकारो की प्रतिभाए निखर कर सामने आती थी वही यहाँ की जनता को देश के माने जाने कलाकरो को सुनने और देखने का मौका मिलता था लेकिन सपा की सरकार बनने बाद यह यह महोत्सव बंद कर दिया है। जौनपुर शाही किले में अपने कला का जलवा विखेर रहे देश के माने जाने कलाकारो के साथ स्थानीय गायको का यह फुटेज जौनपुर विरासत 2011 -2012 का है। यह कार्यक्रम बसपा सरकार में तत्कालीन संस्कृति मंत्री सुभाष पाण्डेय शुरू कराया था। बीएसपी सरकार में संस्कृति विभाग द्वारा हर वर्ष फिरोजशाह तुगलक के इस किले होता था। 3 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में स्थानीय कलाकरो को मौका दिया जाता था साथ ही देश स्तर के कलाकार अपना जलवा विखेर थे। धीरे धीरे यह कलाकारो का पर्व भी बन गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन होते ही इस महोत्सव का सूर्य ही अस्त हो गया। स्थानीय कलाकारो में मायूसी ही छा गई। इसी मंच पहलीबार अपनी प्रतिभा को तरासकर देश स्तर के भोजपुरी गायकी में अपनी और जौनपुर की पहचान बनाने वाले रविद्र सिंह जोति ने मुख्यमंत्री से सैफई महोत्सव के खर्चे को बाटकर पुरे प्रदेश के जिले में महोत्सब कराने का अपील किया है।
जौनपुर विरासत को बंद होने से जितना गायक कलाकारो में मायूसी है उससे कही ज्यादा यहाँ के जनता में आक्रोश है। जनता इसका जिम्मेदार सीधे मंत्रियो और स्थानीय विधायको ठहरा रही है.
जौनपुर विरासत को बंद होने के पीछे राज्यमंत्री रिबू श्रीवास्तव ने भी स्थानीय नेताओ की कमी ही बतायी है। कई जनता ने यहाँ तक कह ड़ाला कि मुख्यमंत्री जी हम लोग भी इंसान है मेरे अंदर भी दिल है मै भी माधुरी दीक्षित और सलमान खान का ठुमका देखना चाहता हूँ।