दीवारों पर ऐसे गार्डनिंग कर सजाएं अपना घर
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लोग अपने घरों को सुंदर और मनोरम बनाने के तमाम उपाय करते हैं।
तमाम तरह के फूलों के गॉर्डन और पेड़ पौधों को लगाते हैं, लेकिन शायद ही
आपने सुना होगा कि घरों के अंदर भी गॉर्डन का पूरा लुफ्त उठाया जा सकता है।
कैसे और कहां इस्तेमाल किया जा सकता हैं वॉल गॉर्डन
बीएचयू हार्टिकल्चर डिपार्टमेंट के प्रो. डॉ एसपी सिंह ने घरों के
अंदर वॉल गार्डनिंग के कुछ दिलचस्प टिप्स बताए हैं, जिसके जरिए आप अपने
घरों के अंदर बगीचे का लुफ्त उठा पाएंगे। इससे जहां आपको घर के अंदर ही
प्राकृतिक सौंदर्य नजर आएगा, वहीं यह स्वास्थ्य के लिए भी कारगर होगा। इस
विधि से दीवारों को कोई नुकसान भी नहीं होगा।
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| जानकारी देते डॉ 0 एसपी सिंह |
डॉ एसपी सिंह ने बताया कि यह तकनीक विदेशों में प्रचलित है। भारत में
विशेषज्ञ न होने के कारण इसे बहुत कम जगहों पर देखा जाता है। वॉल गार्डनिंग
के लिए सबसे पहले लोहे के हल्के एंगल पर फ्रेम तैयार किया जाता है। जितनी
बड़ी घर के अंदर की दीवार होती है, फ्रेम उससे छोटा होता है।
इस स्ट्रक्चर को पॉलीपाट कहा जाता है। पॉलीपाट प्लांटर को दीवार से
चार इंच कि दूरी पर स्थित किया जाता है। पॉट में लगभग दो इंच की दूरी होनी
चाहिए। कॉकपिट वर्मी कुलाइट प्लाटर, जिसमें प्लांट लगाए जाएंगे उसका
कनेक्शन ऊपर के छोटे से वॉटर टब से होगा। इसमें से ऑटोमैटिक पानी आवश्कता
अनुसार गिरता रहेगा। इसे टपक पद्धति भी कहते हैं।
कौन-कौन से पौधे इसमें लगाए जाते हैं
डॉ सिंह ने बताया कि इस सिंचाई पद्धति के तहत ड्रिप इरिगेशन सिस्टम
होता है, जिससे पानी की मात्रा उचित समय के लिए बिल्कुल सेट रहती हैं। एक
लीटर पानी से दीवारों पर आसानी से वाल गार्डनिंग का लुफ्त उठाया जा सकता
है। इस पद्धति से दीवारों में न ही नमी आती है और न ही दीवारे ख़राब होती
है।
सिंह ने बताया कि इसे लिविंग वाल यानि जीवंत दीवार की संज्ञा दी जा
सकती है। प्रमुख रूप से आसानी से मिलने वाले पौधों में ट्रेडन क्रेसियां,
क्लोरो फाइटम, ड्रेसना, विगोनिया, कार्डिलाइन, रोहियो डिस्कलर, पेपरोमियां
और लेमन ग्रास गूदेदार पत्तियों वाले पौधों का प्रचलन होता है। इन्हें
वर्टिकल और होरिजेंटल आकार में लगाया जा सकता है। इन पौधों में पानी की
आवश्यकता कम पड़ती है और इन्हें धूप की भी जरूरत नही होती।


