किसी की आत्मा ऑइल पेंटिंग में सालों तक रह सकती हैं?
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वाराणसी. क्या मरने के बाद किसी की आत्मा ऑइल पेंटिंग में सालों तक रह सकती हैं? इस सच्ची घटना में शैलेश बाबू के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। बात उन दिनों कि है जब शैलेश बाबू डिब्रूगढ़ टी-स्टेट में लोगों के लिए मेस चलाया करते थे। हरी बाबू (बदला हुआ नाम) भी उन दिनों काशी से डिब्रूगढ़ काम करने पहुंचे थे।
शैलेश बाबू की मेस में हरी बाबू भी लोगों के साथ रहने लगे। वहीं शैलेश बाबू की पत्नी की एक बड़ी सी ऑइल पेंटिंग उनके कमरे में टंगी थी। एक रात हरी बाबू ने एक बहुत सुंदर महिला को शैलेश बाबू का पांव बिस्तर पर दबाते देखा, यह देख उनके होश उड़ गए क्योंकि महिला की शक्ल ऑइल पेंटिंग वाली महिला से हूबहू मिल रही थी।
हरी बाबू 60 के दशक में टी स्टेट में काम करने के लिए डिब्रूगढ़ पहुंचे थे। मेस शैलेश बाबू चलाते थे, अजनबी शहर होने के कारण हरी बाबू ने मेस में ही रहना पसंद किया। एक दिन देर रात पूर्णिमा के दिन हरी बाबू ने शाम को शैलेश बाबू के कमरे में रखी ऑइल पेंटिंग को देखा तो उन्हें विचित्र सी रहस्यमय अनुभूति महसूस हुई। उसी रात को नींद न आने पर वह हरी बाबू के कमरे से बाहर आए, तो उन्होंने शैलेश बाबू के पास दो स्त्रियों को देखा। दोनों उनकी सेवा कर रही थी। हरी बाबू चीखे, कि शैलेश बाबू गैर औरतों के साथ। इतना कहते ही दोनों स्त्रियां अचानक गायब हो गई। नीचे से मेस में ही काम करने वाले जतीन बाबू भी चले आए। शैलेश बाबू उठकर कमरे में गए। हरी बाबू भी कमरे में दाखिल हुए, जैसे ही उनकी नजर ऑइल पेंटिंग पर पड़ी, रौंगटे खड़े हो गए। पेंटिंग में महिला की आंखे (हरी बाबू) को घूर रही थी, मानो कोई साक्षात देख रहा हो। उस दिन से उन्हें चित्र से डर लगने लगा। जतीन बाबू ने सुबह बताया कि शैलेश बाबू आपसे बहुत प्यार करते हैं, हरी बाबू का चेहरा उनके दामाद से मिलता है। इसी लिए शैलेश बाबू उनके प्यार करते हैं। उस दिन के बाद से हरी जब भी ऑइल पेंटिंग की ओर देखते, मानो उसे यही लगता कि महिला साक्षात् कुछ कहना चाहती हो।
मेस के सारे स्टाफ विजयादशमी पर छुट्टी पर चले गए। हरी बाबू ने एक रात फिर देखा कि दो महिलाएं छत पर शैलेश बाबू के पैर दबा रही हैं। वह फिर से चीख पड़े कि पलक झपकते दोनों महिलाए फिर से गायब हो गई। बहुत पूछने पर जतीन बाबू ने बताया कि 'वह शैलेश बाबू की बेटी और पत्नी की आत्माएं थी। एक दिन मैं सच जानने के लिए शैलेश बाबू के कमरे में दाखिल हुआ। ऑइल पेंटिंग की महिला आखों में अंगार लिए मानो मुझे नुकसान पहुंचाना चाहती थी। जतीन बाबू ने मुझे उस दिन बचा लिया। कमरे से बाहर आकर जतीन बाबू ने दोनों आत्माओं के रहस्यों को बताया कि ऑइल में शैलेश बाबू की स्वर्गवासी पत्नी और दूसरी महिला उनकी बेटी है, जिसकी हत्या उसके पति ने शराब के नशे में कर दी थी। शैलेश बाबू अपने दामाद को बेहद प्यार करते थे। दामाद की शक्ल तुमसे मिलती है। जतीन बाबू ने एक और चौंकाने वाला सच बताया कि दामाद खीरु मेरा ही बेटा था, जिसकी शक्ल तुम्हारी तरह थी। पत्नी और बेटी शैलेश बाबू को मरने के बाद भी प्यार करती रही। ऑइल पेंटिंग में मानों उनकी पत्नी का वास है। इसी कारण से उस पेंटिग कि महिला अपने दामाद के रूप में देख तुमसे चिढ़ती थी।'
पूरी कहानी सुनने के बाद हरी बाबू ने फैसला लिया कि वह डिब्रूगढ़ छोड़कर कही और चले जाएंगे। हरी बाबू अगले दिन कोलकाता की ट्रेन पकड़ने स्टेशन पहुंचे। जतिन बाबू और शैलेश बाबू उनको छोड़ने आए। जतीन ने हरी बाबू से कहा कि आज दूसरी बार उनका बेटा उनसे दूर जा रहा है। शैलेश बाबू ने सिर्फ इतना कहा 'कि पिछले जन्म में तुमने सांस और पत्नी के प्यार को नहीं समझा था, इसी सीख के लिए इस जन्म में तुम यहां आए थे।' तभी ट्रेन चल पड़ी, ऑइल पेंटिंग वाली महिला मानो सामने खड़ी थी और यही कह रही थी कि इस जन्म में जीवन साथी को बहुत प्यार देना।

