इन दस कारणों के चलते मोदी बनारस से लड़ सकते है चुनाव !
https://www.shirazehind.com/2014/02/blog-post_1545.html
वाराणसी. कुछ दिनों पहले सरसंघ चालक मोहन भागवत ने काशी में स्वयं सेवकों के साथ तीन दिनों तक बैठक की थी, जिसमें काशी से मोदी के चुनाव लड़ने पर भी मंत्रणा हुई थी। कार्यकर्ताओं ने मोहन भागवत से चर्चा में इस बात का जिक्र किया था कि मोदी काशी से चुनाव लड़ें।
सवाल उठता है कि आखिर काशी ही क्यों? दरसल काशी विश्व पटल पर देश की सांस्कृतिक राजधानी है। देश ही नहीं, विदेशों से लोग काशी को जानने-देखने आते हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काशी का नाम बहुत ऊंचा है। जानकारों की मानें तो राममंदिर का मुद्दा पुराना हो गया है। राम के नाम पर बीजेपी बहुत राजनीति कर चुकी है। अब बाबा विश्वनाथ की नगरी से मोदी हिंदुत्व की नई शुरुआत कर सकते हैं।
1. अमिताभ भट्टाचार्या ने बताया कि बीजेपी के लिए हिंदुत्व का मुद्दा सर्वोपरि है। पहले राम के नाम पर राजनीति की गई, अब शिव की बारी है। दरअसल अयोध्या के राम मंदिर की तरह दबे पांव बीजेपी मोदी के जरिए इस बार काशी से शिव के नाम को राजनीतिक रंग दे सकती है। बीजेपी ने एक समय जिस तरह बाबरी मस्जिद के मुद्दे को तूल दिया था ठीक वैसे ही इस बार ज्ञानवापी मस्जिद को मुद्दा बनाने पर उसकी नजर हो सकती है।
2. मोदी को मालूम है कि काशी दुनिया के मानचित्र में आध्यात्मिक नगरी है। देश और दुनिया से दर्शनार्थी और पर्यटक काशी आते हैं। मोदी के लिए इससे अच्छी जगह कोई और नहीं मिल सकती।
3. लोकल बीजेपी लीडर पर पार्टी भरोसा नहीं कर पा रही है। डॉ. मुरली मनोहर जोशी को काशी की जनता ने चुना था, लेकिन वे जनता के बीच बहुत कम रहे हैं। दूसरा कोई लोकल लीडर चुनाव निकालने की भूमिका में नहीं है।
4. पूर्वांचल की सीटों पर भी मोदी की नजर है। 32 सीटों में 10 सपा, 10 बीएसपी, 8 कांग्रेस और 4 बीजेपी के पास हैं। बीजेपी की स्थिति पूर्वांचल में काफी कमजोर है। इस फैक्टर में मोदी फिट बैठते हैं। काशी से उनके चुनाव लड़ने पर सीटों में भारी इजाफा हो सकता है।
5.मोदी अपनी पिछली काशी की रैली के दौरान मंदिर और मठों के कुछ महंतों से भी मिले थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी प्रमुख मंदिरों के महंत और संतों का समर्थन चाहते हैं। धर्म गुरुओं से मिलकर मोदी की मंत्रणा पहले ही चुनावी बिगुल का संकेत दे चुकी है।
6.अयोध्या के बाद हिंदुत्व के मुद्दे को पूरी दुनिया में आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा केंद्र काशी बन सकता है। विश्व पटल पर काशी को हिंदुओं के लिए मक्का माना जाता है।
7. 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 24 सीटें पूर्वांचल से निकाली थीं। जो बाद में आते-आते केवल चार सीटों तक सिमट गईं। काशी इन सीटों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा। मोदी की निगाह इस पर भी है। 8.पूर्वांचल का इलाका काफी पिछड़ा है। गुजरात के विकास मॉडल को प्रस्तुत कर मोदी काशी को सेंटर बनाना चाहते हैं। उनको मालूम है अब यहां की जनता को विकास चाहिए। काशी को सेंटर बनाकर पूर्वांचल की सभी सीटों पर नजर है।
9.भौगोलिक दृष्टि से पूर्वांचल मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे प्रदेशों को भी प्रभावित करता है। काशी से चुनाव लड़ने पर इन प्रदेशों में सीटों का इजाफा किया जा सकता है।
10.संघ के कार्यकर्ताओं ने भी मोदी के काशी से चुनाव लड़ने की मांग को सरसंघ चालक मोहन भागवत के सामने रखी है। संघ भी चाहती है कि अयोध्या के बाद काशी से हिंदुत्व के मुद्दे को उठाया जाए। जो आने वाले चुनाव में सार्थक परिणाम दे सकते हैं।
1. अमिताभ भट्टाचार्या ने बताया कि बीजेपी के लिए हिंदुत्व का मुद्दा सर्वोपरि है। पहले राम के नाम पर राजनीति की गई, अब शिव की बारी है। दरअसल अयोध्या के राम मंदिर की तरह दबे पांव बीजेपी मोदी के जरिए इस बार काशी से शिव के नाम को राजनीतिक रंग दे सकती है। बीजेपी ने एक समय जिस तरह बाबरी मस्जिद के मुद्दे को तूल दिया था ठीक वैसे ही इस बार ज्ञानवापी मस्जिद को मुद्दा बनाने पर उसकी नजर हो सकती है।
2. मोदी को मालूम है कि काशी दुनिया के मानचित्र में आध्यात्मिक नगरी है। देश और दुनिया से दर्शनार्थी और पर्यटक काशी आते हैं। मोदी के लिए इससे अच्छी जगह कोई और नहीं मिल सकती।
3. लोकल बीजेपी लीडर पर पार्टी भरोसा नहीं कर पा रही है। डॉ. मुरली मनोहर जोशी को काशी की जनता ने चुना था, लेकिन वे जनता के बीच बहुत कम रहे हैं। दूसरा कोई लोकल लीडर चुनाव निकालने की भूमिका में नहीं है।
4. पूर्वांचल की सीटों पर भी मोदी की नजर है। 32 सीटों में 10 सपा, 10 बीएसपी, 8 कांग्रेस और 4 बीजेपी के पास हैं। बीजेपी की स्थिति पूर्वांचल में काफी कमजोर है। इस फैक्टर में मोदी फिट बैठते हैं। काशी से उनके चुनाव लड़ने पर सीटों में भारी इजाफा हो सकता है।
5.मोदी अपनी पिछली काशी की रैली के दौरान मंदिर और मठों के कुछ महंतों से भी मिले थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी प्रमुख मंदिरों के महंत और संतों का समर्थन चाहते हैं। धर्म गुरुओं से मिलकर मोदी की मंत्रणा पहले ही चुनावी बिगुल का संकेत दे चुकी है।
6.अयोध्या के बाद हिंदुत्व के मुद्दे को पूरी दुनिया में आगे बढ़ाने का सबसे बड़ा केंद्र काशी बन सकता है। विश्व पटल पर काशी को हिंदुओं के लिए मक्का माना जाता है।
7. 1998 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 24 सीटें पूर्वांचल से निकाली थीं। जो बाद में आते-आते केवल चार सीटों तक सिमट गईं। काशी इन सीटों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र साबित होगा। मोदी की निगाह इस पर भी है। 8.पूर्वांचल का इलाका काफी पिछड़ा है। गुजरात के विकास मॉडल को प्रस्तुत कर मोदी काशी को सेंटर बनाना चाहते हैं। उनको मालूम है अब यहां की जनता को विकास चाहिए। काशी को सेंटर बनाकर पूर्वांचल की सभी सीटों पर नजर है।
9.भौगोलिक दृष्टि से पूर्वांचल मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड जैसे प्रदेशों को भी प्रभावित करता है। काशी से चुनाव लड़ने पर इन प्रदेशों में सीटों का इजाफा किया जा सकता है।
10.संघ के कार्यकर्ताओं ने भी मोदी के काशी से चुनाव लड़ने की मांग को सरसंघ चालक मोहन भागवत के सामने रखी है। संघ भी चाहती है कि अयोध्या के बाद काशी से हिंदुत्व के मुद्दे को उठाया जाए। जो आने वाले चुनाव में सार्थक परिणाम दे सकते हैं।

