हत्या आरोपी जफराबाद के थानेदार विनोद दुबे निलम्बित
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सन 2010 में इलाहबाद में दो युवको का किया था फर्जी एनकाउंटर
जौनपुर जिले के पुलिस अधीक्षक भारत सिंह यादव ने आखिरकार जफराबाद के थानाध्यक्ष विनोद दुबे को कल देर रात निलम्बित कर दिया। विनोद दुबे इलाहबाद के घूरपुर थाने में वर्ष 2010 में दर्ज प्राथमिकी में हत्या के आरोपी है और सीबीसीआईडी वाराणसी की टीम ने इनकी गिरफ्तारी के लिए एसपी जौनपुर को लिखित पत्र लिखकर अनुरोध किया था।
पुलिस सूत्रो के अनुसार उप निरीक्षक विनोद दुबे वर्ष 2010 में इलाहबाद जिले के घूरपुर के थानाध्यक्ष के रूप में तैनात थे। 14 फरवरी 2010 की रात में इन्होने संजय निषाद पुत्र राम अभिलाष निवासी लवायन कला थाना अधौगिक क्षेत्र व अशोक निषाद पुत्र किशोरी निवासी नीबी थाना नैनी को फर्जी इनकाउण्टर में मार गिराया था। इस मामले में अपराध संख्या एकतीस सन 2010 धारा 302 , 323 , व 506 भा0 द 0 वि 0 बनाम विनोद दुबे व चार सिपाहियो के नाम दर्ज हुआ। मामला प्रदेश शासन के संज्ञान में गया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने विनोद दुबे को बर्खास्त कर दिया था। बाद में ये न्यायालय से बहाल हुए। इस मुकदमे की विवेचना उस समय सीबीसीआईडी इलाहबाद को मिली तो सी बी नंबर 69 सन 2010 पड़ा और विवेचना में विनोद दुबे को बचाने का प्रयास होने लगा तो शासन ने इस विवेचना को सीबीसीआईडी वाराणसी सेक्टर को दे दिया। वाराणसी सीबीसीआईडीने सीबी नंबर 186 सन 2012 दर्ज कर विवेचना शुरू किया और थानाध्यक्ष जफराबाद (जौनपुर ) विनोद दुबे व चार सिपाही को संजय निषाद व अशोक निषाद की हत्या का दोषी पाया। सीबीसीआईडी के निरीक्षक सारनाथ सिंह ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक सीबीसीआईडी से डी एस आर स्वीकृत कराया और पुलिस अधीक्षक जौनपुर को हुकुम तहरीरी दिया कि एसओ जफराबाद विनोद दुबे को गिरफ्तार कर इलाहबाद न्यायालय में पेश करे। एक सप्ताह बाद कल देर रात एसपी ने विनोद दुबे को निलबित कर दिया।
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| आरोपी थानेदार विनोद दुबे |
पुलिस सूत्रो के अनुसार उप निरीक्षक विनोद दुबे वर्ष 2010 में इलाहबाद जिले के घूरपुर के थानाध्यक्ष के रूप में तैनात थे। 14 फरवरी 2010 की रात में इन्होने संजय निषाद पुत्र राम अभिलाष निवासी लवायन कला थाना अधौगिक क्षेत्र व अशोक निषाद पुत्र किशोरी निवासी नीबी थाना नैनी को फर्जी इनकाउण्टर में मार गिराया था। इस मामले में अपराध संख्या एकतीस सन 2010 धारा 302 , 323 , व 506 भा0 द 0 वि 0 बनाम विनोद दुबे व चार सिपाहियो के नाम दर्ज हुआ। मामला प्रदेश शासन के संज्ञान में गया तो तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने विनोद दुबे को बर्खास्त कर दिया था। बाद में ये न्यायालय से बहाल हुए। इस मुकदमे की विवेचना उस समय सीबीसीआईडी इलाहबाद को मिली तो सी बी नंबर 69 सन 2010 पड़ा और विवेचना में विनोद दुबे को बचाने का प्रयास होने लगा तो शासन ने इस विवेचना को सीबीसीआईडी वाराणसी सेक्टर को दे दिया। वाराणसी सीबीसीआईडीने सीबी नंबर 186 सन 2012 दर्ज कर विवेचना शुरू किया और थानाध्यक्ष जफराबाद (जौनपुर ) विनोद दुबे व चार सिपाही को संजय निषाद व अशोक निषाद की हत्या का दोषी पाया। सीबीसीआईडी के निरीक्षक सारनाथ सिंह ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल करने के लिए प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक सीबीसीआईडी से डी एस आर स्वीकृत कराया और पुलिस अधीक्षक जौनपुर को हुकुम तहरीरी दिया कि एसओ जफराबाद विनोद दुबे को गिरफ्तार कर इलाहबाद न्यायालय में पेश करे। एक सप्ताह बाद कल देर रात एसपी ने विनोद दुबे को निलबित कर दिया।

