सन 1989 बाद से जौनपुर का हुआ सत्यानाश , मेडिकल कालेज का स्थापना पड़ा खटाई में

उत्तर प्रदेश में 1989 बाद शुरू शुरू हुई मण्डल कमन्डल और जाति वादी राजनीत ने जौनपुर के विकास की मटियामेट करते हुए विनाश की तरफ ढकेल दिया है। इस जिले में अग्रेजों के समय से स्थापित रतना शुगर मिल को बसपा ने कौड़ियो के भाव बेच दिया तो सपा ने कताई मिल ,तिलकधारी सिंह होम्यो पैथिक मेडिकल कालेज और पराग डेरी को बंद कर दिया। सतहरिया इडस्ट्रीयल एरिया और त्रिलोचन इडस्ट्रीयल एरिया अंतीम सांसे गिन रहा है। पूर्वांचल विश्वविद्यालय का बटवारा करके इसके कद को छोटा करने का काम भी बीएसपी ने ही किया था । समाजवादी पार्टी ने कताई मिल की जमीन पर मेडिकल कालेज स्थापित कराकर जौनपुर की जनता के जख्मो पर मरहम लगाने काम 22 फरवरी को करने जा रही थी लेकिन आज से आचार्य संहिता लगने का कारण उसके मसूबे पर पानी फिर गया है।
शिराज ए हिन्द जौनपुर का इतिहास किसी से छिपा नहीं है। इस शहर को फिरोज शाह तुगलक ने सन 1359 में बसाया था। शर्की बादशाहो ने इसे अपनी राजधानी बनाकर इसकी सीमा दूर दूर तक फैलाया था शर्कीकाल की स्थापित दर्जनो इमारते आज भी जौनपुर राज्य की गाथा बयां कर रही है। लेकिन सबसे अफशोष बात है कि यहाँ के नेताओ में इच्छा शक्ति के कमी के कारण आज तक इस जिले को पयर्टन नक्शे से महरूम रखा गया।  फ़िलहाल कांग्रेस के शासनकाल कुछ विकास रोशनी की किरणे इस शहर पर पड़ी थी यहाँ पर कताई मिल  तिलकधारी सिंह होम्यो पैथिक मेडिकल कालेज और पराग डेरी सतहरिया इडस्ट्रीयल एरिया और त्रिलोचन इडस्ट्रीयल एरिया स्थापित हुआ था रतना शुगर मिल अग्रेजो से विरासत में मिला था। लेकिन 1989 बाद यूपी में राज करने वाली सरकारे और स्थानीय जनप्रतिनिधियो की उदासीनता के कारण एक एक कर सभी कल कारखाने बंद होते गये। इस दरम्यान पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा सांसद स्वामी चिन्मयानन्द  ने जिला अस्पताल के विल्डिंग पुनः निर्माण कराने, मुबई के लिए गोदान ट्रेन चलवाने का काम किया सन 2006 में नगर की जनता को जाम के झाम से निजात दिलाने के लिए गोमती नदी पर सद्भावना पुल का निर्माण हुआ लेकिन श्रेय तत्कालीन जिलाधिकारी अनुराग यादव को यहाँ की जनता दे रही है।
पिछले 10 वर्षो में बेहतसा हुई जनसंख्या बृद्धि के कारण जाम की समस्या और विकराल हो गया है बेरोजगारो की फौजे खड़ी दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी ने कताई मिल की जमीन पर मेडिकल कालेज स्थापित कराकर जौनपुर की जनता के जख्मो पर मरहम लगाने काम 22 फरवरी को करने जा रही थी लेकिन आज से आचार्य संहिता लगने का कारण उसके मसूबे पर पानी फिर गया है।

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