पूर्वांचल को भी बनाया जाय अलग राज्यः मंगलेश्वर त्रिपाठी

जौनपुर। पूर्वांचल प्राकृतिक सम्पदाओं से परिपूर्ण है। यहां पर रोजगार के अच्छे अवसर होने के साथ यह उत्तर भारत का महत्वपूर्ण राजनैतिक क्षेत्र भी है, फिर भी पूर्वांचल के साथ अब तक की सभी सरकारों ने उपेक्षात्मक रवैया अपनाया। उक्त बातें पूर्वांचल नवनिर्माण समिति के अध्यक्ष मंगलेश्वर त्रिपाठी ‘मुन्ना’ पत्र-प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुये कही। पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग करते हुये उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश उत्तर प्रदेश से भौगोलिक एवं जनसंख्या की दृष्टि से छोटा प्रदेश है किन्तु पूर्वांचल अलग राज्य बनने की सभी मानकों को पूरा कर रहा है, फिर भी उसे अलग राज्य का दर्जा न दिया जाना यहां के लोगों के साथ सौतेलापन है। श्री त्रिपाठी ने कहा कि पूर्वांचल में पैदा की जाने वाली बिजली देश के सभी हिस्सों में बेची जाती है तथा यहां उपजाऊ भूमि के कारण किसानी अत्यधिक होती है। इतना ही नहीं, शिक्षा एवं औद्योगिक क्षेत्र में भी पूर्वांचल अग्रणी स्थान रहता है, फिर भी इस क्षेत्र के साथ हमेशा नाइंसाफी की जाती रही। अन्त में उन्होंने कहा कि जब तक पूर्वांचल अलग राज्य नहीं बनता है, तब तक इस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास असंभव है।

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