पौराधिक काल से ही मिला है सद्गुरू को सर्वोच्च स्थानः पाण्डेय
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जौनपुर। विश्व को शांति, सद्भावना व ‘वैसुधव कुटुम्बकम’ का संदेश देने वाली भारत भूमि प्राचीन काल से ही मानव मात्र को प्रेम, शांति व धार्मिक सहिष्णुता का संदेश देती रही है। यह भारत भूमि की विशेषता रही है कि पौराधिक काल से ही सद्गुरू को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। सद्गुरू एक समय में एक ही होता है। धार्मिक ग्रंथों में सद्गुरू की महिमा के विषय में अनेक दृष्टांत मिलते हैं। उक्त उद्गार नगर के मडि़याहूं पड़ाव पर स्थित संत निरंकारी सत्संग भवन पर गुरू पूजा दिवस पर विशाल संत समूह को सम्बोधित करते हुये जेएन पाण्डेय जोनल इंचार्ज ने व्यक्त किया। इसके पहले निरंकारी बाबाजी के 60वें जन्मदिवस पर विशेष सफाई अभियान के अन्तर्गत श्रद्धालुओं ने चांदपुर रेलवे क्रासिंग से लेकर पालिटेक्निक चैराहे तक सफाई कार्य किया। इस कार्यक्रम का शुभारम्भ संयोजक श्याम लाल साहू ने किया। इसी क्रम में निरंकारी सेवादल द्वारा रैली निकाली गयी जिसमें सैकड़ों की संख्या मंे भाई, बहन, बच्चे आदि शामिल रहे। इस दौरान खेलकूद, पीटी परेड, प्रार्थना, मार्चिंग गीत, बिच्छू दौड़, गुब्बारा तोड़, बाल बैलेंसिंग, तीन अंगी दौड़, डांसिंग सहित अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इसी प्रकार केराकत, नौपेड़वा, सिकरारा सहित अन्य ब्रांचों पर गुरू पूजा दिवस का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का संचालन स्थानीय मीडिया प्रभारी उदय नारायण जायसवाल ने किया। इस अवसर पर डा. जितेन्द्र यादव, राजेश प्रजापति, डा. खुर्शीद अहमद, शकील अहमद, आंचल वर्मा, रीना, बाल किशुन, राजकुमार मिश्रा, प्रभाकर, डा. महेन्द्र, अजीत आदि उपस्थित रहे।
खुटहन संवाददाता के अनुसार गुरू ईश्वर का रूप होता है। गुरू कृपा के बिना मोक्ष संभव नहीं है तथा इसके बिना भक्ति भी असंभव है। गुरू के कमलवत चरण की सेवा अभिमान को त्याग करके करना चाहिये। उक्त बातें खुटहन क्षेत्र के संत निरंकारी भवन मदरहा बन्दनपुर में 60वें गुरू पूजा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख शंकर दयाल ने कही। उन्होंने कहा कि भौतिकता में आवश्यकताएं अनन्त होती हैं। जो आपको मिल गयी है, उसी में संतोष करना चाहिये। दूसरे के अवगुणों को स्वप्न में भी देना देखना चाहिये। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. आरपी सिंह व संचालन राम किशुन यादव ने किया। इस दौरान लंगर की व्यवस्था की गयी थी जहां सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर शिवशंकर सेठ, कोमल यादव, जहलू राम, शिवनाथ, रामफेर, प्रेमा, सुमन, शीतला देवी सहित तमाम सम्बन्धित लोग उपस्थित रहे।
खुटहन संवाददाता के अनुसार गुरू ईश्वर का रूप होता है। गुरू कृपा के बिना मोक्ष संभव नहीं है तथा इसके बिना भक्ति भी असंभव है। गुरू के कमलवत चरण की सेवा अभिमान को त्याग करके करना चाहिये। उक्त बातें खुटहन क्षेत्र के संत निरंकारी भवन मदरहा बन्दनपुर में 60वें गुरू पूजा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख शंकर दयाल ने कही। उन्होंने कहा कि भौतिकता में आवश्यकताएं अनन्त होती हैं। जो आपको मिल गयी है, उसी में संतोष करना चाहिये। दूसरे के अवगुणों को स्वप्न में भी देना देखना चाहिये। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. आरपी सिंह व संचालन राम किशुन यादव ने किया। इस दौरान लंगर की व्यवस्था की गयी थी जहां सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर शिवशंकर सेठ, कोमल यादव, जहलू राम, शिवनाथ, रामफेर, प्रेमा, सुमन, शीतला देवी सहित तमाम सम्बन्धित लोग उपस्थित रहे।
