भारतीय संविधान ने दी है हरेक को ‘एक दिन की बादशाहत’ : आकि़ल जौनपुरी

  जौनपुर। अपने देश पर इसलिये भी गर्व है कि ‘भारतीय संविधान’ ने हर हिन्दुस्तानी को एक दिन की ही सही मगर ऐसी ‘बादशाहत’ प्रदान की है जिसके आगे गरीब या अमीर उम्मीदवार भी अपना ‘भिक्षा पात्र’ (चुनाव चिन्ह) लिये वोट की भीख मांगने के लिये दिन-रात एक किये। यह अलग बात है कि हर चुनाव लड़ने वाला अच्छी तरह जानता है कि जनता का वोट हासिल करके अगर ‘विजयश्री’ मिल गयी तो अगले 5 वर्षों तक ‘राजा भोज’ बने रहने से उसे कोई नहीं रोक सकता।
    जनता का वोट कितना क़ीमती है, इसका भरपूर एहसास होना चाहिये। वोट ज़रूर दीजिये मगर वोट देने के पहले कुछ बातों पर ‘चिन्तन’ करने की ज़रूरत है। वोट देने का पहला तरीक़ा यह है कि आपकी आंखों पर जिस पार्टी की पट्टी बंधी है, उसके उम्मीदवार (अच्छा हो या ख़राब) की झोली में बग़ैर सोचे-समझे वोट डाल दें। दूसरा यह कि प्रचार-प्रसार के माध्यम से जिसकी हवा बह रही हो, आप उसके पक्ष में वोट करें। तीसरा यह कि किसी को रोकने के लिये आप स्वयं को ‘स्पीड ब्रेकर’ समझते हुये अपना वोट दें। चैथा यह कि किसी को बिला वजह हराने या जिताने के लिये अपना वोट डाल दें। पांचवां यह कि अपने ‘क्षेत्रीय ठेकेदार’ के कहने पर (वह जिसको चाहे) अपना वोट दें। छठवां यह कि अपने मिलने-जुलने वालों की बातों से सहमत होकर किसी पार्टी या ‘व्यक्ति विशेष’ को वोट दें। सातवां तरीक़ा यह कि आप अपने विवेक से और यह जानकर वोट दें कि आपका एक वोट देश की दिशा व दशा तय करेगा। हमारे नज़दीक सातवाँ तरीक़ा ही ‘सर्वोत्तम’ है।
    ‘गुज़रे 5 वर्षों का ‘चुनावी लेखा-जोखा आपके सामने है। परिवारवाद, पूंजीवाद, बेरोज़गारी, मंहगाई, बेतहाशा बिजली कटौती, जनपद की टूटी-फूटी सड़कें और ऐसी ही बहुत सारी समस्याएं आपके सामने हैं। दूसरी तरफ़ कंाग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल सहित निर्दल उम्मीदवारों के चेहरे भी आपके सामने हैं। यह सौभाग्य है कि इस चुनाव मंे लगभग सभी प्रत्याशी जौनपुर के जाने-पहचाने हंै। कोई मंत्री है, कोई पूर्व मंत्र्त्री, कोई सांसद रह चुका है तो कोई होना चाहता है। यानी सभी का ‘समाजसेवी रूप’ आपके सामने है। ऐसे में बहुत सोच-समझकर अपना वोट दीजिये। मतदान करते वक़्त बस इतना ध्यान रहे कि आपने जिसको वोट देने का फ़ैसला किया है, वह फ़ैसला शत-प्रतिशत सही हो। हार-जीत की चिन्ता किये बगै़र आप ऐसे प्रत्याशी को वोट दें जिसके ‘सांसद’ होने पर जनपद का नाम पूरे भारत में रोशन हो सके। यानी आपकी ‘वोटिंग’ से समूचे भारत को यह संदेश जाय कि जौनपुर वालों ने बहुत सोच-समझकर ‘सांसद’ चुना है। वरना मशहूर इंक़लाबी शायर ‘क़ामिल शफ़ीक़ी’ की काव्य पुस्तिका ‘चहारसू’ में संकलित 4 पंक्तियाँ अगले 5 वर्षांे तक हर किसी को तड़पाती रहेंगी’- ज़ीस्त से बेज़ार हो जिस तरह कोई बदनसीब, बादिले-ना ख्वास्ता कुछ रोज़ जी लेने के बाद। वोट देकर अपनी नादानी का आता है ख्याल, मौत का जैसे तसव्वुर ज़ह्र पी लेने के बाद।
    आखि़र में हम आपसे गुज़ारिश करेंगे कि बहुत सोच-विचार के उसको वोट दें जिससे जनपद का ही नहीं, बल्कि सर्वसमाज का विकास हो सके। याद रहे कि अच्छा आदमी सत्ता पक्ष में हो या विपक्ष में, वह समाज के लिये हमेशा अच्छा ही साबित होगा और अगर आप खुद को किसी निर्णायक अवस्था में नहीं पाते तो ‘इलेक्शन कमीशन’ ने आपको ‘राइट टू रिजेक्ट’ का भी अधिकार दे रखा है। अपने अधिकार का इस्तेमाल कीजिये, मगर वोट ज़रूर दीजिये। आपका एक वोट किसी को भी जिताने या हराने की पूरी क्षमता रखता है... किसी बहकावे या प्रलोभन में आये बगै़र ‘सच्चे मन’ से वोट दीजिये, ताकि आपको अपनी ‘वोटिंग’ पर 5 वर्षों तक कोई पछतावा न हो।

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