चार इंजीनियरिंग कालेजों में खुलेंगे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
https://www.shirazehind.com/2014/06/blog-post_26.html
लखनऊ। इंजीनियरिंग के के क्षेत्र में शोध में उत्कृष्टता हासिल करने के
लिए प्रदेश सरकार के चार राजकीय इंजीनियरिंग कालेजों में छह 'सेंटर ऑफ
एक्सीलेंस' स्थापित करेगी। तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए इनमें
इन्नोवेशन व इन्क्यूबेशन सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश
यादव के इस निर्णय के के बाद प्राविधिक शिक्षा विभाग इसे अमली जामा पहनाने
की कवायद में जुट गया है।
प्रदेश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेज अभियांत्रिकी की विभिन्न विधाओं में शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए विख्यात हैं। ंमसलन कानपुर का हारकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआइ) केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मशहूर है। लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आइईटी) को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस,इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में विशिष्टता हासिल है। गोरखपुर का मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय (एमएमएमटीयू) मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित है। कानपुर के उप्र टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीटीआइ) को टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रुतबा हासिल है। अपनी विशेषताओं के बावजूद यह संस्थान संसाधनों के अभाव में बीते कुछ वर्षो के दौरान तकनीक और शोध में पिछड़ गए। सरकार चाहती है कि इन चारों कालेजों को जिन क्षेत्रों में दक्षता हासिल है, उनमें शोध और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएं।
प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा नीरज गुप्ता ने बताया कि इस फैसले के तहत एचबीटीआइ में केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग, आइईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रानिक्स तथा कंप्यूटर साइंस व इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, एमएमएमटीयू में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और टीटीआइ में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए कालेजों को अवस्थापना सुविधाएं और उपकरण मुहैया कराए जाएंगे। इससे इन विधाओं में आधुनिक तकनीक और नए उत्पादों को विकसित करने में मदद मिलेगी। कालेज उद्योगों से भी तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान कर सकेंगे। शोध के आधार पर जो नई तकनीक व उत्पाद विकसित होंगे, उनका पेटेंट कराया जाएगा। दूसरे इंजीनियरिंग कालेज भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।
प्रदेश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कालेज अभियांत्रिकी की विभिन्न विधाओं में शैक्षिक उत्कृष्टता के लिए विख्यात हैं। ंमसलन कानपुर का हारकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (एचबीटीआइ) केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए मशहूर है। लखनऊ के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आइईटी) को इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस,इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में विशिष्टता हासिल है। गोरखपुर का मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय (एमएमएमटीयू) मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रतिष्ठित है। कानपुर के उप्र टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीटीआइ) को टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रुतबा हासिल है। अपनी विशेषताओं के बावजूद यह संस्थान संसाधनों के अभाव में बीते कुछ वर्षो के दौरान तकनीक और शोध में पिछड़ गए। सरकार चाहती है कि इन चारों कालेजों को जिन क्षेत्रों में दक्षता हासिल है, उनमें शोध और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएं।
प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा नीरज गुप्ता ने बताया कि इस फैसले के तहत एचबीटीआइ में केमिकल और सिविल इंजीनियरिंग, आइईटी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग व इलेक्ट्रानिक्स तथा कंप्यूटर साइंस व इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, एमएमएमटीयू में मैकेनिकल इंजीनियरिंग और टीटीआइ में टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए कालेजों को अवस्थापना सुविधाएं और उपकरण मुहैया कराए जाएंगे। इससे इन विधाओं में आधुनिक तकनीक और नए उत्पादों को विकसित करने में मदद मिलेगी। कालेज उद्योगों से भी तकनीकी विशेषज्ञता का आदान-प्रदान कर सकेंगे। शोध के आधार पर जो नई तकनीक व उत्पाद विकसित होंगे, उनका पेटेंट कराया जाएगा। दूसरे इंजीनियरिंग कालेज भी इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

