इराक में हुए कत्लेआम के विरोध में निकला विशाल जुलूस
https://www.shirazehind.com/2014/06/blog-post_361.html
इराक में शिया समुदाय पर किए जा रहे हमलों के विरोध की गर्मी जौनपुर के शाहगंज महसूस कर रही है। आक्रोशित पुरुष, महिलाएं और बच्चे बुद्धवार को
आतंकवाद विरोधी आवाज के साथ सड़क पर उतर गए। शिया जुमा कमेटी के आह्वान पर जुलूस निकाल कर इराक में बेगुनाहों के हो रहे कत्लेआम,
आतंकवाद एवं अमानवीय कृत्यों के खिलाफ नारे लगाए।
सुबह 10 बजे से ही शाहपंजा स्थित रौज़े पर शिया वर्ग के लोगों का जुटना शुरू हो गया था। गर्मी एवं उमस के बावजूद पर्दानशीं महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर हिस्सेदारी करने को बेकरार थीं। भारी भीड़ जुलूस की शक्ल में घास मंडी होते हुए आगे बढ़ा। आगे-आगे आलिमों की खासी तादाद थी। महिलाओं एवं बच्चों के हाथों में नारे लिखी तख्तियां थीं। लोगों ने आतंकवाद मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। लोगों का गुस्सा उनके चेहरे से साफ दिख रहा था। तहसील पहुंच कर आलिमों ने उपजिलाधिकारी पदुम सिंह को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। मौलाना कैफ़ी ने कहा कि आतंकवादियों का कोई मजहब नहीं होता। बेगुनाहों का खून बहाने वाले कभी इस्लाम को मानने वाले नहीं हो सकते। उन्होंने केंद्र सरकार से इराक में हो रहे कत्लेआम को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने की गुजारिश की।
सुबह 10 बजे से ही शाहपंजा स्थित रौज़े पर शिया वर्ग के लोगों का जुटना शुरू हो गया था। गर्मी एवं उमस के बावजूद पर्दानशीं महिलाएं गोद में बच्चों को लेकर हिस्सेदारी करने को बेकरार थीं। भारी भीड़ जुलूस की शक्ल में घास मंडी होते हुए आगे बढ़ा। आगे-आगे आलिमों की खासी तादाद थी। महिलाओं एवं बच्चों के हाथों में नारे लिखी तख्तियां थीं। लोगों ने आतंकवाद मुर्दाबाद, हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए। लोगों का गुस्सा उनके चेहरे से साफ दिख रहा था। तहसील पहुंच कर आलिमों ने उपजिलाधिकारी पदुम सिंह को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। मौलाना कैफ़ी ने कहा कि आतंकवादियों का कोई मजहब नहीं होता। बेगुनाहों का खून बहाने वाले कभी इस्लाम को मानने वाले नहीं हो सकते। उन्होंने केंद्र सरकार से इराक में हो रहे कत्लेआम को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने की गुजारिश की।
