भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग का अस्तित्व होगा समाप्त

जौनपुर : भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को तोड़कर सिंचाई विभाग में मिलाया जा रहा है। इस फरमान से जहां विभाग का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, वहीं जनपद में समेकित जल संग्रहण प्रबंधन परियोजना(आइडब्ल्यूएमपी) पर ग्रहण लग गया है। बेतहाशा बढ़ती आबादी व खेती के घटते दायरे से खाद्यान्न संकट का खतरा मंडराने लगा है। इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकार द्वारा फसल सघनता व उत्पादकता बढ़ाने के साथ ही अनुपयोगी कृषि योग्य ऊसर, बंजर, बीहड़ भूमि का उपचार कर उपजाऊ बनाने की कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। जनपद में अनुपयोगी भूमि को सुधार कर उपजाऊ बनाने व गांवों का विकास के लिए रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेक्टर ने सर्वे कर प्लान तैयार किया था। जिले में डेढ़ दशक तक चलने वाली इस योजना में लगभग 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे। प्रथम चरण में डोभी ब्लाक का चयन किया गया। इसके लिए सात करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ था। ब्लाक में 5837 हेक्टेयर भूमि का सुधार कर उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित था। इसके अलावा जलस्तर बढ़ाने के लिए असिंचित क्षेत्रों में पानी रोकने के लिए मेड़बंदी और जलभराव वाले इलाकों में पानी की निकासी की व्यवस्था कर भूमि को खेती योग्य बनाना भी प्रस्तावित था। संस्था खेती के अलावा बागवानी, डेयरी, मुर्गी पालन आदि के लिए भी किसानों को प्रशिक्षित कर प्रोत्साहित और गांवों में स्वयं सहायता समूह बनाकर लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जाना है। खेती के अलावा गांवों के विकास के लिए टूटी सड़कों, पुराने हैंडपंपों, कुओं और पुराने तालाबों की मरम्मत आदि कार्य भी होगा। हैंडपंपों व घरों का पानी रोकने की व्यवस्था होगी तथा किसानों की मीटिंग के लिए गांवों में किसान मंच का निर्माण किया जाता है। दूसरे चरण में धर्मापुर, करंजाकला व मुफ्तीगंज विकास खंड में लगभग 15000 हेक्टेयर में सुधार कार्यक्रम चलाया जाना था। इसके लिए प्लान भी भेज दिया गया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के शुरू होने से पूर्व ही भूमि विकास एवं जल संसाधन ंिवभाग की जनपद इकाई को प्रदेश सरकार ने ललितपुर स्थानांतरित कर दिया। इसके चलते योजना ठप हो गई थी। इसके बाद आइडब्लूडीपी की मिर्जापुर इकाई को जिले में जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2010-11 में लागू योजना के तहत केवल प्रारंभिक क्रिया-कलापों के लिए मामूली धनराशि मुक्त की गई। चार साल बीतने को हैं, भूमि सुधार व अन्य कार्यो के लिए धन नहीं आया। विभाग के 22 कर्मचारी बैठकर धन आवंटन का इंतजार कर रहे हैं। सूबे की सरकार द्वारा भूमि विकास एवं जल संसाधन विभाग को खत्म कर सिंचाई विभाग में मिलाते हुए सिंचाई व जल संसाधन विभाग बना दिया गया। शासनादेश लागू होने के बाद जहां विकास का अस्तित्व खत्म हो जाएगा वहीं आइडब्ल्यूएमपी सहित कई महत्वाकांक्षी योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। जानकारी के लिए संपर्क करने पर बताया गया कि प्रभारी बीएसए राजेंद्र बहादुर गाजीपुर जिलाधिकारी की बैठक में शामिल होने गए हैं। कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि विभाग को तोड़कर नया विभाग बनाने का शासनादेश निर्गत कर दिया गया है।

Related

खबरें 3328836021185785249

एक टिप्पणी भेजें

emo-but-icon

AD

जौनपुर का पहला ऑनलाइन न्यूज़ पोर्टल

आज की खबरे

साप्ताहिक

सुझाव

संचालक,राजेश श्रीवास्तव ,रिपोर्टर एनडी टीवी जौनपुर,9415255371

जौनपुर के ऐतिहासिक स्थल

item