जाम के जबड़े में जनता, प्रशासन फेल
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जौनपुर : नगर भीषण जाम की चपेट में है। पीक आवर में तो वक्त ही ठहर सा जाता है। लोगों की गतिविधियां शून्य हो जाती हैं। नासूर बन चुकी इस दुर्व्यवस्था से निजात पाने में प्रशासन लगातार असफल होता जा रहा है। डेढ़ दशक से अपनाए जा रहे सभी फार्मूले नाकाम साबित हुए। प्रशासन पूरी तरह से निष्क्रिय हो गया है। कोई प्रयास तो दूर, कभी जाम से निजात पाने के लिए होने वाली कवायद भी अब बंद हो चुकी है। पूछने पर तो अधिकारी बीते दिनों में किए गए प्रयासों पर ही वाहवाही लूटते हैं। आगे क्या प्रयास होगा! कौन सी व्यवस्था करेंगे! इस पर कुछ बोल पाने में सक्षम नहीं दिखते।
हालत बेकाबू है न तो कहीं वन-वे सिस्टम, न ही पार्किंग की व्यवस्था। व्यस्त इलाकों की सड़कें भी अतिक्रमण की चपेट में। यातायात को संचालित करने के लिए ट्रैफिक सिपाही की व्यवस्था भी नहीं। सड़कों पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह से बेअंदाज। फिर कल्पना की जा सकती है कि संकरी हो चुकी सड़कों पर वाहन आसानी से कैसे गुजर सकते हैं।
यातायात की समुचित नीति न बनाए जाने के कारण मनमानी ढंग से शहर में वाहन प्रवेश कर जाते हैं। इसका दुष्प्रभाव होता है कि एक वाहन फंसा तो महज 5 मिनट में लंबी कतारें लग जाती हैं। दो हिस्से में विभाजित शहर में वन-वे सिस्टम को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए तो जाम के झाम से मुक्ति तो नहीं किंतु राहत अवश्य मिलेगी।

