अब घर बैठे देखे सकेंगे मानचित्र
https://www.shirazehind.com/2014/06/blog-post_693.html
जौनपुर : जनपदवासियों के लिए अच्छी खबर है। अब किसी भी गांव के भूमि का
मानचित्र देखने और उसकी नकल लेने के लिए लेखपाल और अभिलेखागार का चक्कर
नहीं काटना होगा। वजह जिले के सभी गांवों के मानचित्र को आनलाइन कर दिया
जाएगा। इसके लिए तीव्रगति से कार्य चल रहा है।
जिले के सभी गांवों का मानचित्र कागज पर बनाया गया है। इसमें अधिकांश मानचित्र जगह-जगह से फट गए है। जिसके कारण लोगों को सही मानचित्र लेने के बाद भी पैमाइस कराने में दिक्कत होती है। मौजूदा समय में मछलीशहर नगर पंचायत मानचित्र है ही नहीं। मड़ियाहूं और सदर तहसील के कई गांवों का मानचित्र फट गया है। जिसके कारण सही स्थान पर भूमि की पैमाइस नहीं हो पाती है। इसे लेकर लोगों को लेखपाल से लेकर अभिलेखागार तक का चक्कर लगाना पड़ता है। भारत सरकार की इस नई व्यवस्था से लोगों को काफी राहत मिलेगी। वजह कोई भी एक स्थान पर बैठकर इंटरनेट से कही की किसी भी भूमि का मानचित्र देख और उसकी नकल निकाल सकता है।
प्रदेश के पांच जिलों के मानचित्र को ही पहले चरण में ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया है। जिसमें जौनपुर, मथुरा, बाराबंकी, गाजियाबाद, हापुड़ जिले शामिल है। जिसके लिए काम भी तीव्र गति से चल रहा है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मानचित्र आनलाइन किए जाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस समय जिले के 15 सौ से ज्यादा गांवों के नक्शों की फीडिंग हो चुकी है।
जिलाधिकारी सुहास एलवाई, अपर जिला अधिकारी राधेश्याम से शासन ने मानचित्र आनलाइन किए जाने के बारे में आने वाली दिक्कतों के बारे में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए जानकारी हासिल किया। साथ ही अन्य जरूरी दिशा निर्देश दिए।
अपर जिलाधिकारी वृत्त एवं राजस्व राधेश्याम ने बताया कि गांवों के मानचित्र को आनलाइन करने का काम तेजी से चल रहा है। इस समय 15 सौ से ज्यादा गांवों के मानचित्र की फीडिंग हो चुकी है। चार जुलाई तक मानचित्र आनलाइन करने की योजना है।
जिले के सभी गांवों का मानचित्र कागज पर बनाया गया है। इसमें अधिकांश मानचित्र जगह-जगह से फट गए है। जिसके कारण लोगों को सही मानचित्र लेने के बाद भी पैमाइस कराने में दिक्कत होती है। मौजूदा समय में मछलीशहर नगर पंचायत मानचित्र है ही नहीं। मड़ियाहूं और सदर तहसील के कई गांवों का मानचित्र फट गया है। जिसके कारण सही स्थान पर भूमि की पैमाइस नहीं हो पाती है। इसे लेकर लोगों को लेखपाल से लेकर अभिलेखागार तक का चक्कर लगाना पड़ता है। भारत सरकार की इस नई व्यवस्था से लोगों को काफी राहत मिलेगी। वजह कोई भी एक स्थान पर बैठकर इंटरनेट से कही की किसी भी भूमि का मानचित्र देख और उसकी नकल निकाल सकता है।
प्रदेश के पांच जिलों के मानचित्र को ही पहले चरण में ऑनलाइन करने का निर्णय लिया गया है। जिसमें जौनपुर, मथुरा, बाराबंकी, गाजियाबाद, हापुड़ जिले शामिल है। जिसके लिए काम भी तीव्र गति से चल रहा है।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक मानचित्र आनलाइन किए जाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इस समय जिले के 15 सौ से ज्यादा गांवों के नक्शों की फीडिंग हो चुकी है।
जिलाधिकारी सुहास एलवाई, अपर जिला अधिकारी राधेश्याम से शासन ने मानचित्र आनलाइन किए जाने के बारे में आने वाली दिक्कतों के बारे में वीडियों कांफ्रेंसिंग के जरिए जानकारी हासिल किया। साथ ही अन्य जरूरी दिशा निर्देश दिए।
अपर जिलाधिकारी वृत्त एवं राजस्व राधेश्याम ने बताया कि गांवों के मानचित्र को आनलाइन करने का काम तेजी से चल रहा है। इस समय 15 सौ से ज्यादा गांवों के मानचित्र की फीडिंग हो चुकी है। चार जुलाई तक मानचित्र आनलाइन करने की योजना है।

