जौनपुर में प्रेस का दुरूपयोग आखिरकार कैसे रूकेगा?
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जौनपुर। प्रेस की बहुमुखी उपयोगिता पर कभी शर्म आती है तो कभी अफसोस भी होता है कि पत्रकारिता या पत्रकारिता के सिम्बल अर्थात् प्रेस का इतना दुरूपयोग होगा। पत्रकारिता के पूर्वजों ने स्वप्न में भी नहीं सोचा होगा कि देश में कहीं प्रेस शब्द की प्रतिष्ठा भले ही हो किन्तु जौनपुर में प्रेस शब्द और सिम्बल की जितनी दुर्गति हो रही है, उतनी कहीं नहीं देखी जाती। उक्त विचार जनपद के वरिष्ठ पत्रकार श्याम पाण्डेय जी का है जिनका कहना है कि जिस व्यक्ति के वाहन को देखिये, वह प्रेस लिखाकर टहल रहा है जबकि प्रेस से उस व्यक्ति का दूर-दूर तक सम्बन्ध भले ही न हो। पत्रकारिता से जुड़े वे लोग जो संवाद लेखन (रिपोर्टिंग) से सम्बन्धित हैं अथवा जो संवाद सम्पादन (एडिटिंग) से सम्बन्धित हैं और वे डेस्क पर बैठते हैं, उन्हें लोग नहीं जानते, क्योंकि वे पत्रकारिता रूपी इमारत के नींव के पत्थर हैं। वे प्रेस लिखे वाहन पर चलते हैं। उन्हें ही ऐसे वाहनांे पर चलना चाहिये। आज जो लोग प्रेस मशीन चलाते हैं अथवा छपाई के व्यवसाय से सम्बन्धित हैं, उनकी संख्या सैकड़ों में हैं। ऐसे लोग धड़ल्ले से मोटरसाइकिल आदि पर प्रेस लिखवाकर टहल रहे हैं। युवा वर्ग जिनकी उम्र 18 से 25 के आस-पास है, वे मनमानी तौर पर बगैर डीएल और वैध कागजातों के गाड़ी चलाते हैं। उनकी हार्दिक इच्छा होती है कि उनकी गाड़ी पर प्रेस लिखा हो और पुलिस उनकी गाड़ी को न रोके। वे किसी न किसी पत्रकार के सम्पर्क में आकर उनकी चापलूसी करके अपनी गाड़ी पर प्रेस लिखवा लेते हैं। श्री पाण्डेय का कहना है कि भू-माफिया, ठेकेदार तो किसी न किसी प्रेस से पैसे के बल पर कार्ड हस्तगत कर लेते हैं और अपनी गाड़ी पर प्रेस ही नहीं लिखवाते, बल्कि किसी महत्वपूर्ण अधिकारी या नेता की प्रेस कान्फ्रेंस में सबसे आगे बैठते हैं और अवांछनीय सवाल करने लगते हैं। पुलिस से विशेष लगवा रखने वाले लोग जैसे प्रायः थाना, पुलिस चैकी, पुलिस लाइन, पुलिस दफ्तर और जगह न मिलने कहीं खड़े रहने वाले लोग भी प्रेस से जुड़कर और चमकीले रंग-रोगन से अपने वाहन पर प्रेस लिखवाकर चल रहे हैं। अवैध मादक पदार्थों जैसे गांजा आदि की जिला स्तर पर तस्करी करने वाले लोग भी अपनी गाड़ी के अंदर मादक पदार्थ रखकर और बाहर प्रेस लिखवाकर अपना अवैध व्यापार कर रहे हैं। पुलिस गफलत में रहती है कि ये पत्रकार हैं। क्या पत्रकारिता पर कालिख लगाने वाले इन लोगांे पर भी नियंत्रण का कोई उपाय है? यदि हां तो कौन है जो इसे अंजाम देगा? ये सारे लोग पुलिस के आस-पास ही देखे जाते हैं?

