300 साल पहले इस तरह दिखता था मोदी का बनारस

 फोटोग्राफी डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनारस आपको लिए चलते हैं। यह एशिया का सबसे प्राचीन शहर है। यहां की जीवन शैली, अल्हड़पन, हवेलियां, मीनारें और मंदिर को लेकर 18वीं शताब्दी में लार्ड मैकाले ने यही कहा था। उन्होंने यहां के साड़ों और सीढ़ियों की भी तारीफ की थी। 17वीं शताब्दी में इटली के यात्री मनूची ने लिखा है कि बनारस से स्वर्ण और रजत जरी के वस्त्रों का विदेशों में निर्यात किया जाता था। उस समय पांच लाख लोगों की भीड़ और पवित्रता को लेकर भी मैकाले सम्मोहित हो गया था। 
 
पूरी दुनिया 19 अगस्त को वर्ल्ड फोटोग्राफी डे मनाती है। विश्व की प्राचीनतम नगरी में शामिल काशी को जानने, समझने और देखने के लिए हर दिन हजारों लोग आते हैं। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की कुछ दुर्लभ तस्वीरों को प्रकाशित कर रहा है, जिसके माध्यम से वाराणसी के कुछ रोचक तथ्यों को जाना जा सकता है। 
 
दुनिया के सबसे पुराने शहरों में शुमार काशी की प्राचीनता को लेकर रिसर्च किए जा रहे हैं। कई यात्रियों और लेखकों ने काशी का जिक्र किताबों में और अपने लेखों में किया हैं। पहला जिक्र जो मिलता है, वह है चीनी यात्री ह्वेन त्संग का, जो हर्ष वर्धन के शासन काल (606 से 47 ई.) में काशी आए थे। यहां के मंदिर, नगर, लोगों का पूरा वर्णन ह्वेन त्संग ने किया था। बाद में 8वीं सदी के विद्वान पंत ने तत्कालीन काशी का सामाजिक, धार्मिक जीवन शैली का वर्णन किया।

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