डाक विभाग के कर्मचारी के साथ यह हाल है तो आम जनता के साथ कैसा होगा?
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जौनपुरः डाक महकमें के कर्मचारी के कार्यों का अंदाजा इस बात से बखूबी लगाया जा सकता है कि विभाग में ही कार्यरत रहे मृतक कर्मचारी के ग्रुप इंश्योरेंस 1992 योजना के तहत भुगतान पाने के लिए मृतक आश्रित विगत लगभग तीन वर्षों से डाक अधीक्षक कार्यालय का चक्कर लगा रहा है। औपचारिकता के नाम पर फार्म भरवाया जाता है वर्षों दौड़ाने के बाद उसी फार्म में गलती बताकर फार्म को कैंसिल कर दूसरा फार्म भरवाया जाता है। यही प्रक्रिया बदस्तूर जारी है। जितने का भुगतान नहीं उससे अधिक की धनराशि पीडि़त दावाकर्ता की किराये भाड़े में खर्च हो गई है। यह मामला है नगर के दीवानी उपडाकघर में जी.डी.एस पैकर्स के पद पर कार्यरत रहे स्व0 सैयद मुहम्मद जकी की गु्रप इंश्योरेंस धनराशि के भुगतान का।
जानकारी के अनुसार नासही मुहल्ला जफराबाद निवासी स्व0 सैयद मुहम्मद जकी जो दीवानी कचहरी उपडाकघर में बतौर जी.डी.एस कार्यरत थे। जिनकी सेवाकाल के दौरान 16 मई 2011 को मृत्यु हो चुकी है। मृतक आश्रित कोटे की नौकरी देना तो दूर की बात स्वयं मृतक का ग्रुप इंश्योरेंस योजना में जमा धन का भुगतान करने में यह विभाग हीला हवाली कर रहा है। स्व0 जकी के पुत्र सैयद फैजान आब्दी ने पिता की मृत्योपरांत डाक अधीक्षक कार्यालय में ग्रुप इंश्योरेंस योजना के तहत भुगतान पाने के लिए दिसम्बर 2011 में दावा प्रस्तुत किया था। आरोप है कि काफी चक्कर लगाने के बाद तत्कालीन डीलिंग क्लर्क राम आसरे यादव ने अप्रैल 2013 में दावा स्वीकृति हेतु डीपीए कार्यालय अलीगंज लखनऊ को भेजा जो कि एक माह बाद आपत्ति लग कर वापस आ गया। जिसके बाद पुनः दूसरा फार्म भरकर समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति कराते हुए वर्तमान डीलिंग क्लर्क राम शिरोमणि यादव ने जुलाई 2014 में दोबारा से स्वीकृति हेतु लखनऊ भेजा। इस बार यह किया गया कि दावा तो भेजा गया लेकिन जरूरी कागजात जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की प्रति आदि को नहीं भेजा गया जिस कारण पुनः यह दावा एक माह बाद वापस आ गया। तीसरी बार जब पीडि़त ने कार्यालय पर सम्पर्क किया तो बताया गया कि दावा आपत्ति लग कर वापस आया है फिर से फार्म भरा जायेगा और कमियों को दुरूस्त किया जायेगा जिसके बाद ही उसे स्वीकृति हेतु भेजा जायेगा। गौरतलब हो कि क्लेम फार्म को क्लर्क ही भरता है दावाकर्ता केवल हस्ताक्षर करता है। उसके बाद भी कभी धनराशि गलत भर दी जाती है तो कभी आवश्यक संलग्नक नहीं लगाया जाता है। इस संबंध में पीडि़त का आरोप है कि यह सब इस लिए किया जा रहा है कि क्लर्क द्वारा मांगी गई सुविधा शुल्क को उसने देने से इंकार कर दिया था। जिसका खामियाजा उसे कार्यालय का चक्कर कटवा कर दिया जा रहा है। क्लर्क की इस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर पीडि़त ने सीपीएमजी लखनऊ आशुतोष त्रिपाठी, निदेशक डाक सेवाएं इलाहाबाद परिक्षेत के.के. यादव, पी.एम.जी. इलाहाबद एम.ई.हक सहित विभाग के तमाम उच्चाधिकारियों से शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।
जानकारी के अनुसार नासही मुहल्ला जफराबाद निवासी स्व0 सैयद मुहम्मद जकी जो दीवानी कचहरी उपडाकघर में बतौर जी.डी.एस कार्यरत थे। जिनकी सेवाकाल के दौरान 16 मई 2011 को मृत्यु हो चुकी है। मृतक आश्रित कोटे की नौकरी देना तो दूर की बात स्वयं मृतक का ग्रुप इंश्योरेंस योजना में जमा धन का भुगतान करने में यह विभाग हीला हवाली कर रहा है। स्व0 जकी के पुत्र सैयद फैजान आब्दी ने पिता की मृत्योपरांत डाक अधीक्षक कार्यालय में ग्रुप इंश्योरेंस योजना के तहत भुगतान पाने के लिए दिसम्बर 2011 में दावा प्रस्तुत किया था। आरोप है कि काफी चक्कर लगाने के बाद तत्कालीन डीलिंग क्लर्क राम आसरे यादव ने अप्रैल 2013 में दावा स्वीकृति हेतु डीपीए कार्यालय अलीगंज लखनऊ को भेजा जो कि एक माह बाद आपत्ति लग कर वापस आ गया। जिसके बाद पुनः दूसरा फार्म भरकर समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति कराते हुए वर्तमान डीलिंग क्लर्क राम शिरोमणि यादव ने जुलाई 2014 में दोबारा से स्वीकृति हेतु लखनऊ भेजा। इस बार यह किया गया कि दावा तो भेजा गया लेकिन जरूरी कागजात जैसे मृत्यु प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की प्रति आदि को नहीं भेजा गया जिस कारण पुनः यह दावा एक माह बाद वापस आ गया। तीसरी बार जब पीडि़त ने कार्यालय पर सम्पर्क किया तो बताया गया कि दावा आपत्ति लग कर वापस आया है फिर से फार्म भरा जायेगा और कमियों को दुरूस्त किया जायेगा जिसके बाद ही उसे स्वीकृति हेतु भेजा जायेगा। गौरतलब हो कि क्लेम फार्म को क्लर्क ही भरता है दावाकर्ता केवल हस्ताक्षर करता है। उसके बाद भी कभी धनराशि गलत भर दी जाती है तो कभी आवश्यक संलग्नक नहीं लगाया जाता है। इस संबंध में पीडि़त का आरोप है कि यह सब इस लिए किया जा रहा है कि क्लर्क द्वारा मांगी गई सुविधा शुल्क को उसने देने से इंकार कर दिया था। जिसका खामियाजा उसे कार्यालय का चक्कर कटवा कर दिया जा रहा है। क्लर्क की इस कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर पीडि़त ने सीपीएमजी लखनऊ आशुतोष त्रिपाठी, निदेशक डाक सेवाएं इलाहाबाद परिक्षेत के.के. यादव, पी.एम.जी. इलाहाबद एम.ई.हक सहित विभाग के तमाम उच्चाधिकारियों से शिकायत करते हुए न्याय की गुहार लगाई है।

