पितृपक्ष पर पुरखों को दिया गया पिंडदान
https://www.shirazehind.com/2014/09/blog-post_945.html
गंगा घाटों पर उमड़ी लोगों की भीड़
भदोही। पितृपक्ष का मंगलवार खास दिन रहा। लोगों ने पिंडदान के जरिए जहां पुरखों को याद किया, वहीं ब्राहमणों को पितरों की आत्म शांति के भोजन कराया। जिले भर में गंगा घाटों, नदियों और तालाबों पर दिन भर पिंडदान का कार्यक्रम चलता रहा। गंगा घाटों पर पुरोहितों और नाइयों की मांग अधिक देखी गयी।
दिवंगत हो चुके पुरखों की शांति के लिए हिंदू धर्म में 15 दिन का पाक्षिक पर्व होता है। इस पूरे पखवारे में पितरों को याद किया जाता है। उन्हें मंत्रों और आराधना के जरिए बुलाया जाता है। वैदिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में अपनी शक्ति और सामर्थ के अनुसार पितरों को जलार्पण और उनकी आत्म शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। यह हिंदू धर्म की प्रचीन और वैदिक मान्यता है कि इससे जहां पितर प्रशन्न होते हैं वहीं घर में सुख और सवृद्धि आती है। मान्यता के अनुसार पितरों को पिंडदान अवश्य करना चाहिए। इस दिन लोग मान्यता के अनुसार मंडन संस्कार कराते हैं। इसके बाद पवित्र जल में स्नान करने के बाद जौ, खोवे और चावल से पिंडदान की क्रिया निभाते हैं। वैदिक मान्यता के अनुसार पिंडदान यानी श्राद्ध कर्म के बाद ब्राहमणों का भोजन कराना चाहिए। बाद में अपनी शक्ति के अनुसार दक्षिणा भी देनी चाहिए। ऐसा न करन से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती है। अगर आपके पास शक्ति नहीं है तो आप पूरे पखवारे पर पितरों को याद कर केवल जल तिलांजलि दें। इससे भी पितरो की आत्मा को मोक्ष मिलता है। पिंडदान की प्रक्रिया पवित्र नदियों, तालाबों और कुंडों पर करनी चाहिए। मंगलवार को जिले के गंगा तटों पर पिंडदान करने वालों की काफी भीड़ देखी गयी। सीतामढ़ी, रामपुर, बेरवा, बिहरोजपुर, इटवां समेत दूसरे घाटों पर भारी संख्या में लोगों ने पहुंच कर पिंडदान किया। इस दौरान पिंडदान दिलाने के लिए पुरोहितों की अधिक मांग देखी गयी। नाइयों के पास मुंडन संस्कार के लिए कतारें लगी थी। जो लोग गंगा या पवित्र स्थलों पर नहीं जा सके उन्होंने घर पर पितरों का पिंडदान किया।
भदोही। पितृपक्ष का मंगलवार खास दिन रहा। लोगों ने पिंडदान के जरिए जहां पुरखों को याद किया, वहीं ब्राहमणों को पितरों की आत्म शांति के भोजन कराया। जिले भर में गंगा घाटों, नदियों और तालाबों पर दिन भर पिंडदान का कार्यक्रम चलता रहा। गंगा घाटों पर पुरोहितों और नाइयों की मांग अधिक देखी गयी।
दिवंगत हो चुके पुरखों की शांति के लिए हिंदू धर्म में 15 दिन का पाक्षिक पर्व होता है। इस पूरे पखवारे में पितरों को याद किया जाता है। उन्हें मंत्रों और आराधना के जरिए बुलाया जाता है। वैदिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष में अपनी शक्ति और सामर्थ के अनुसार पितरों को जलार्पण और उनकी आत्म शांति के लिए पिंडदान किया जाता है। यह हिंदू धर्म की प्रचीन और वैदिक मान्यता है कि इससे जहां पितर प्रशन्न होते हैं वहीं घर में सुख और सवृद्धि आती है। मान्यता के अनुसार पितरों को पिंडदान अवश्य करना चाहिए। इस दिन लोग मान्यता के अनुसार मंडन संस्कार कराते हैं। इसके बाद पवित्र जल में स्नान करने के बाद जौ, खोवे और चावल से पिंडदान की क्रिया निभाते हैं। वैदिक मान्यता के अनुसार पिंडदान यानी श्राद्ध कर्म के बाद ब्राहमणों का भोजन कराना चाहिए। बाद में अपनी शक्ति के अनुसार दक्षिणा भी देनी चाहिए। ऐसा न करन से पितरों की आत्मा को शांति नहीं मिलती है। अगर आपके पास शक्ति नहीं है तो आप पूरे पखवारे पर पितरों को याद कर केवल जल तिलांजलि दें। इससे भी पितरो की आत्मा को मोक्ष मिलता है। पिंडदान की प्रक्रिया पवित्र नदियों, तालाबों और कुंडों पर करनी चाहिए। मंगलवार को जिले के गंगा तटों पर पिंडदान करने वालों की काफी भीड़ देखी गयी। सीतामढ़ी, रामपुर, बेरवा, बिहरोजपुर, इटवां समेत दूसरे घाटों पर भारी संख्या में लोगों ने पहुंच कर पिंडदान किया। इस दौरान पिंडदान दिलाने के लिए पुरोहितों की अधिक मांग देखी गयी। नाइयों के पास मुंडन संस्कार के लिए कतारें लगी थी। जो लोग गंगा या पवित्र स्थलों पर नहीं जा सके उन्होंने घर पर पितरों का पिंडदान किया।

