अखण्ड माता के दरबार में हजारों श्रद्वालुओं ने टेका मत्था
https://www.shirazehind.com/2014/10/blog-post_749.html
जौनपुर में भईया दूज के पावन पर्व पर यमदग्नि ऋर्षि के तपो स्थली पर स्थित अखण्ड माता के दरबार में हजारों श्रद्वालुओं ने मत्था टेक कर मां का आर्शिवाद लिया। लोग मनौती पूरी होने पर हलावा पूड़ी और लड्डू मिठाई भी चढ़ाये।
जौनपुर जिले के जमैथा गांव में आदि गंगा गोमती के पावन तट पर स्थित इस भव्य मंदिर में भगवान परशुराम के पिता यमदग्नि नें तपस्या किया था। करीब 108 वर्ष पूर्व बाबा परम्हंस ने भी यही आराधना किया था सन् 1904 में सामाधि लेने से पूर्व परमहंस ने भक्तों से आवाह्न किया कि भईया दूज के दिन जो व्यक्ति परशुराम की माता अंखड देवी के मंदिर में दर्शन पूंजन करगे। उनकी मुरादे पूरी होगी। इस दरबार की महिमा यही समाप्त नही होती शायद इसी लिए इस गांव के लोग दुनियां के किसी कोने में हो पर आज के दिन इस दरबार में हाजिरी लगाना नही भूलते इस मौके पर जहां महिलाओ ने हलवा पूड़ी चढ़ाई वही पुरूष वर्ग के लोगो ने गोमती में स्नान करके मां अखण्ड देवी की आराधना किया। वहीं मेले का लुप्त उठया।
जौनपुर जिले के जमैथा गांव में आदि गंगा गोमती के पावन तट पर स्थित इस भव्य मंदिर में भगवान परशुराम के पिता यमदग्नि नें तपस्या किया था। करीब 108 वर्ष पूर्व बाबा परम्हंस ने भी यही आराधना किया था सन् 1904 में सामाधि लेने से पूर्व परमहंस ने भक्तों से आवाह्न किया कि भईया दूज के दिन जो व्यक्ति परशुराम की माता अंखड देवी के मंदिर में दर्शन पूंजन करगे। उनकी मुरादे पूरी होगी। इस दरबार की महिमा यही समाप्त नही होती शायद इसी लिए इस गांव के लोग दुनियां के किसी कोने में हो पर आज के दिन इस दरबार में हाजिरी लगाना नही भूलते इस मौके पर जहां महिलाओ ने हलवा पूड़ी चढ़ाई वही पुरूष वर्ग के लोगो ने गोमती में स्नान करके मां अखण्ड देवी की आराधना किया। वहीं मेले का लुप्त उठया।


