आतंकवाद का जलाया पुतला

जौनपुर। पाकिस्तान के पेशावर में तालिबानी आतंकियों द्वारा मानवता के विरूद्ध अंधाधुंध गोलीबारी कर 132 मासूम स्कूली बच्चों की हत्या करने के विरोध में छात्रों व नागरिकों ने कोतवाली चौराहे पर आतंकवाद का पुतला जलाकर विरोध जताया गया। साथ ही  वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं ने बुधवार को शोक सभा का आयोजन कर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रख ईश्वर से प्रार्थना की। जनसंचार विभाग के विभागाध्यक्ष डा. अजय प्रताप सिंह ने कहा कि तालिबान आतंकियों द्वारा किया गया यह कृत्य बहुत ही घृणित है। जिस तरह से शिक्षा के मंदिर को श्मसान बना दिया गया है ऐसे कृत्य की किसी भी धर्म में माफी नहीं है। प्रवक्ता डा. दिग्विजय सिंह राठौर ने कहा कि स्कूली बच्चों को कतार में खड़ा कर गोलियां बरसायी गयी है वह आतंकियों की कायरता का सबसे बड़ा परिचय है। इस्लाम में बच्चों को फरिश्ता माना जाता है। यह फरिष्तों पर हमला है। छात्र अब्दुल अहद आजमी ने कहा कि इस्लाम के अनुसार किसी एक निर्दोष को मारना सारी इंसानियत को मारना है, तालिबानियों द्वारा निर्दोषों की जान लेकर इंसानियत का गला घोटा गया है। छात्र मनीष पाण्डेय ने कहा कि इस मुद्दे पर पूरे विश्व को एक साथ खड़ा होने की जरूरत है। धर्म, जाति, मजहब से ऊपर उठकर सोचना पड़ेगा। छात्र अंकित जायसवाल ने कहा कि इस हृदयविदारक घटना से पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया है। बच्चों के चेहरे पर जो भय दिखा उससे षायद ही वह उभर पाएंगे। छात्र दिग्विजय मिश्र ने कहा कि पाकिस्तान सरकार को नये सिरे से आतंकवाद के खिलाफ लड़ने की रणनीति बनाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तालिबानियों के खिलाफ एकजुट होने करने की जरूरत है। 

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