बसपा के पूर्व सांसद उमाकांत यादव एक बार फिर सपा में शामिल !
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| फाइल फोटो |
उमाकांत यादव 1989 के विधानसभा चुनाव में माफिया से नेता बने थे उस चुनाव में जनता दल से खुटहन से विधायक चुने गये उसके बाद 1991 के चुनाव में वे बीजेपी के लालता यादव से चुनाव हार गये थे। 1993 के विधान सभा चुनाव में सपा बसपा गठबंधन से यह सीट भाजपा से छिन लिया। 1996 के चुनाव में सपा के टिकट पर विधायक बने। 2002 के चुनाव में बसपा के ललई यादव ने उमाकांत को करारी शिकस्त देते यह सीट बसपा की झोली में डाल दिया। उसके बाद उमाकांत से सपा मुखिया से अनबन होने के कारण साईकिल की सवारी छोड़कर हाथी पर सवार हो गये। पुराने सारे गिले शिकवे भूलकर मायावती ने उमाकांत पर भरोषा करके 2004 लोकसभा चुनाव में टिकट दिया उमाकांत जेल भीतर रहकर इस चुनाव में भाजपा के कद्दावर नेता केशरीनाथ त्रिपाठी और सपा सांसद सीएन सिंह को करारी शिकस्त देते हुए हाथी का परचम लहराया। सांसद बनने के कुछ महीने बाद उमाकांत जेल से बाहर आये उधर 2007 विधानसभा के चुनाव में बसपा पूर्ण बहुमत से यूपी सरकार बनायी। लेकिन उमाकांत का जमीन प्रेम ने उन्हे फिर जेल में डलवा दिया। उमाकांत के ऊपर आजमगढ़ के सरायमीर बाजार में एक मुसलिम का घर गिराकर कब्जा करने का आरोप लगा तो मायावती ने उन्हे अपने घर बुलाकर जेल भेजवा दिया। जेल में रहते ही एक मामले सजा हो गयी। फिलहाल किसी तरह उमाकांत जेल से बाहर आये 2014 लोकसभा चुनाव में वे खुद और अपने पुत्र दिनेशकांत यादव का पर्चा दाखिला किया हलांकि उमाकांत यादव द्वारा फर्जी हलफनामा जमा करने के कारण चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ कई संगीन धारोओं में मुकदमा दर्ज कराया था। फिलहाल एक बार फिर उमाकांत यादव मुलायम सिंह यादव का दामन थामकर साईकिल की सवारी करने जा रहे है।

