सोमवती अमावस्या पर पूजन अर्चन
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जौनपुर। सोमवती अमावस्या के अवसर पर महिलाओं ने व्रत रखकर पति की दीघार्यु के लिए नदी और सरोवरों में डुबकी लगायी और दान दिया तथा भगवान शिव शंकर माता पार्वती और तुलसी का पूजन किया। साथ ही पीपल की परिक्रमा करके विधिविधान से करने के उपरान्त निर्धनों को भोजन कराया। पूजन में जल पुष्प, अक्षत, चन्दन, धूप आदि का प्रयोग किया जाता है। सोमवार को बड़ी संख्या में शहर के विभिन्न पीपल के वृक्षों पर एकत्रित हो कर आस्था व विश्वास के साथ पूजन करती देखी गयी। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन पीपल के पूजन से सौभाग्य की वृद्धि होती है तथा पितरों को जल देने से उन्हे तृप्ति मिलती है। ज्ञातब्य हो कि सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है। इसलिये सोमवती अमावस्या शिवजी की आराधना को समर्पित होती है। तभी पीपल के वृक्ष में शिव का वास मानकर पूजा और परिक्रमा करती है। माना गया है कि पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में शिवजी तथा अग्र भाग में ब्रह्मा जी का निवास होता है। यह पर्व हमारे भीतर आशा और विश्वास का चन्द्रमा उदित करने के लिए है। दृढ़ विश्वास के सहारे हम किसी भी संकट को पार कर लेते हैं और निर्धनों को दान अािद करके संकट के समय भी अपने सद्गुणों से न डगमगाने का संबल पाते है। इस पर्व की सार्थकता तभी है जब हम संकट से न घबरायें हर परिस्थिति में विश्वास का चन्द्रमा प्रकाश मान रखे। यह व्रत पिरत दोष के लिए अति महत्वपूर्ण माना जाता है यदि दोष नहीं है तो भी पितरों के लिए कल्याण कारी होता है।

