चंद रूपयो के खातिर सैड़को महिलाओं ने धोया अपने मांग का सिंदुर !

जाँच करती एसडीएम रितु सुहास फोटो शिराज़ ए हिन्द डॉट कॉम
 जौनपुर। माता सीता और सती साबित्री के देश में ही सैकड़ो महिलाएं चंद रूपये के खातिर विधवा बन रही है। यही महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए तीज और करवा चैथ के पावन पर्व पर निराजल ब्रत रखती है वही महिलाएं सरकार द्वारा मिलने वाली विधवा पेंसन लेने के लिए कागजो पर विधवा बन जाती है। इस बात का खुलास कुछ समाजसेवी लोगो द्वारा मांगी गयी जनसूचनाधिकार से उजागर होने के बाद एसडीएम रितु सुहास ने जांच किया तो सैकड़ो ऐसी महिलाएं ऐसी मिली कि जो अपने पति के जिन्दा रहते ही अपने मांग का सिंदुर धोकर पेंसन ले रही है।
जिला समाज कल्याण विभाग, जौनपुर में भ्रष्टाचार की हद हो गई है। यहां पर विधवा पेंशन देने के लिए पात्रों का चयन नियमों को ताक पर रख कर किया जाता है। यही कारण है कि लाभ लेने के लिए पतियों के रहते ही महिलाओं को विधवा बना दिया जा रहा है। शासन के धन का अपात्रों को लाभ दिलाने वाले कागजी घोड़ा दौड़ाने में माहिर हो गए है। इसके चलते सभी पात्रों को योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। कुछ मामले में जब शिकायत की गई तो हकीकत सामने आने लगी। जिम्मेदार अधिकारी भी कागजी दौड़ा दौड़ाते हुए जाच अधिकारी नामित कर कर्तव्यों की इतिश्री कर चुके हैं, किंतु जाच के नाम पर अभी तक कुछ भी नहीं शुरू हुआ, जो खुद में प्रश्न खड़ा कर रहा।
करंजाकला विकास के नरौली गाव में मामला प्रकाश में आया है। आशीष कुमार सिंह ने आरटीआइ के तहत जिला समाज कल्याण अधिकारी से सूचना मागी तो मामला खुला। इस मामले पर शिराज़ ए हिन्द डॉट कॉम ने पड़ताल किया तो गाव की 11 महिलाओं को विधवा बनाकर पेंशन दिलाने की बात सामने आई। इसके बाद प्रधान चंद्र प्रकाश सिंह ने शिकायत उच्चाधिकारियों से की। इस पर जाच के लिए डीएम ने अधिकारी भी नामित किए, किंतु आज तक जाच पूर्ण नहीं हो सकी है।
नरौली गाव में जमकर खेल किया गया है। जाच हुई तो कई लोगों का फंसना तय है। शासन के नियमों को ताक पर रख अपात्रों को लाभ दिया गया है। 11 सुहागन महिलाओं में चार ऐसी हैं जिन्हे विधवा के साथ-साथ वृद्धा पेंशन भी दी जा रही है, जबकि शासनादेश के मुताबिक एक साथ दो योजना के तहत किसी को पेंशन धनराशि नहीं दी जा सकती है।
मुफ्तीगंज विकास खंड के उमरी पाडेयपुर के गजराज सिंह ने इससे पहले प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री से लेकर बीडीओ तक शिकायत की थी। आरोप था अपात्रों को विधवा पेंशन योजना का लाभ दिया जा रहा है। मामले की जाच नहीं हो रही थी। प्रकरण संज्ञान में आने के बाद 'दैनिक जागरण' ने खबर को प्रमुखता से 13 सितंबर को प्रकाशित किया था। तब प्रशासन की तंद्रा टूटी तो जाच कराई गई। सूत्रों के मुताबिक गाव में जाच के दौरान आठ सुहागन महिलाएं ऐसी मिली थी जिनके पति जीवित है, किंतु उन्हे कागज पर मृत दिखा दिया गया। जिन्हें पात्र बताते हुए पेंशन की धनराशि दी जा रही है। तारा गाव में डिप्टी कलेक्टर ऋतु सुहास ने तीन दिसंबर को जाच की। जिसमें पति के जीवित होते हुए विधवा पेंशन लेने की बात सामने आई। इस पर जिलाधिकारी स्तर से कार्रवाई भी की जा रही है।

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