जौनपुर आईटीआई कालेज के एडमिशन में हुआ लाखो रूपये का खेल !
https://www.shirazehind.com/2014/12/blog-post_915.html
जौनपुर। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में एडमिशन में जमकर गोलमाल का मामला सामने आया है। यहां पर सारे नियम कानून ताख पर रखकर मन चाहा छा़त्रो का दाखिला लिया गया। यही नही कालेज प्रशासन की मांग पूरी करने पर छात्रो को मनचाहा टेªड भी दिया गया। कुछ छात्रों और कालेज के सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार लाखो रूपये की गुणागणित हुआ है। सबसे हैरत की बात यह सामने आया कि इस कमेटी के सदस्य जिला सेवायोजन अधिकारी को भनक तक नही लगा कि एडमिशन कब हुआ।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिद्दीकपुर स्थित राजकीय आईटीआई में पांचवे चरण का एडमिशन 25 नवम्बर तक हुआ। इस दाखिले के लिए राजकीय आईटीआई सिद्दीकपुर के प्रिंसपल जिलासेवायोजन अधिकारी जौनपुर और आईटीआई कालेज उसरावा की एक कमेटी उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित किया गया था। लेकिन कालेज प्रशासन इस कमेटी को दर किनार करते हुए मनमानी तरीके से छात्रों का प्रवेश ले लिया। शिराजे हिन्द डाॅट काम से कुछ छात्रो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम लोगो से फोन करके कोतवाल चैराहे पर बुूलाकर बीस बीस हजार रूपये की मांग किया गया। जब हम लोगो ने पैसा न देने की बात कही तो हमारा एडमिशन नही लिया गया। कालेज की सूत्रो के अनुसार इस फार्म को मेरिट के अधार पर सिरियल नम्बर से सम्बद्यित बाबू ने चयन कमेटी को फार्म को सौप दिया था। लेकिन चयन कत्र्ताओ द्वारा इस लिस्ट में हेराफेरी करके मुंहमांगी कीमत देने वालो छात्रो का दाखिला ले लिया गया।
इस मामले पर कमेटी के सदस्य जिला सेवायोजन अधिकारी से बात किया गया तो उनका जवाब चैकाने वाला था। उन्होने बताया कि मुझे पता ही नही है कि मै कमेटी हूं न ही मेरे पास कोई पत्र ही आया है। जब एक जिला स्तर के अधिकारी को चकमा देने में कालेज प्रशासन कामयाब रहा तो पात्र छात्रों को किस तरह गेट आउट किया होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते है।
इस मामले पर आईटीआई के प्रधानचार्य से मोबाईल पर उनका पक्ष लिया गया तो उन्होने अपने उपर लगे सारे आरोपो को खारिज करते हुए बताया कि जो भी एडमिशन लिया गया उसमे हाई स्कूल की मार्कशीट के अधार पर और छात्रों विकल्प के अधार पर किया गया है। जब सेवायोजन अधिकारी को सूचित न किये जाने के बारे पुछा गया तो उन्होने कहा हम अधिकारियों के पास काफी काम होते है इस लिए उनको सूचित नही किया बाद में उनका हस्ताक्षर करा लेगंे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सिद्दीकपुर स्थित राजकीय आईटीआई में पांचवे चरण का एडमिशन 25 नवम्बर तक हुआ। इस दाखिले के लिए राजकीय आईटीआई सिद्दीकपुर के प्रिंसपल जिलासेवायोजन अधिकारी जौनपुर और आईटीआई कालेज उसरावा की एक कमेटी उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित किया गया था। लेकिन कालेज प्रशासन इस कमेटी को दर किनार करते हुए मनमानी तरीके से छात्रों का प्रवेश ले लिया। शिराजे हिन्द डाॅट काम से कुछ छात्रो ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम लोगो से फोन करके कोतवाल चैराहे पर बुूलाकर बीस बीस हजार रूपये की मांग किया गया। जब हम लोगो ने पैसा न देने की बात कही तो हमारा एडमिशन नही लिया गया। कालेज की सूत्रो के अनुसार इस फार्म को मेरिट के अधार पर सिरियल नम्बर से सम्बद्यित बाबू ने चयन कमेटी को फार्म को सौप दिया था। लेकिन चयन कत्र्ताओ द्वारा इस लिस्ट में हेराफेरी करके मुंहमांगी कीमत देने वालो छात्रो का दाखिला ले लिया गया।
इस मामले पर कमेटी के सदस्य जिला सेवायोजन अधिकारी से बात किया गया तो उनका जवाब चैकाने वाला था। उन्होने बताया कि मुझे पता ही नही है कि मै कमेटी हूं न ही मेरे पास कोई पत्र ही आया है। जब एक जिला स्तर के अधिकारी को चकमा देने में कालेज प्रशासन कामयाब रहा तो पात्र छात्रों को किस तरह गेट आउट किया होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते है।
इस मामले पर आईटीआई के प्रधानचार्य से मोबाईल पर उनका पक्ष लिया गया तो उन्होने अपने उपर लगे सारे आरोपो को खारिज करते हुए बताया कि जो भी एडमिशन लिया गया उसमे हाई स्कूल की मार्कशीट के अधार पर और छात्रों विकल्प के अधार पर किया गया है। जब सेवायोजन अधिकारी को सूचित न किये जाने के बारे पुछा गया तो उन्होने कहा हम अधिकारियों के पास काफी काम होते है इस लिए उनको सूचित नही किया बाद में उनका हस्ताक्षर करा लेगंे।

